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Yugal Madhuri

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

हरि गुरु हैं समान, वेद वाणी है प्रमान।

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1(गोपाल राधे कृष्ण गोविन्द...)

2हरि गुरु हैं समान, वेद वाणी है प्रमान।

3“यस्य देवे परा भक्तिः” , यह मंत्र धरु ध्यान।

4हरि में ही रह गुरु, गुरु में ही हरि जान।

5हरि का ही दास गुरु, गुरु दास हरि जान।

6हरि कृपा मिले गुरु, गुरु कृपा हरि जान।

7हरि प्राण गुरु जान, गुरु प्राण हरि मान।

8“एष वै भगवान्”, कह भागवत मान।

9“तस्मिंस्तज्जने” सूत्र, नारद बखान।

10हरि तो है परोक्ष, प्रत्यक्ष गुरु जान।

11जीव को तो दे प्रथम, गुरु ही तत्व ज्ञान।

12गुरु साधना करावे, करे दिव्य प्रेमदान।

13याते हरि गुरु दोनों कह, गुरु है महान।

14बिनु हरि भक्ति भी हो, गुरु भक्ति तत्व जान।

15हरि भक्ति तो “कृपालु” बिनु, गुरु हो न जान॥

Original Hindi songs from the supplied standalone Yugal Madhuri edition. This is distinct from Prem Ras Madira's similarly named chapter. Frontmatter retains its own source credits. Supplied edition: Fifth edition, Gita Jayanti, 28 November 2009.

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