Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
गुरुदेव शरण में आई, अब तो लो मोहिँ अपनाई।
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1(लाखों महफिल...)
2गुरुदेव शरण में आई, अब तो लो मोहिँ अपनाई।
3कछु भेंट संग नहिँ लाई, खाली झोली लै आई।
4अँसुवन माला लै आई, दो बिगरी मोरि बनाई।
5मोहिँ भुक्ति मुक्ति नहिँ भाई, चह युगल चरण शरणाई।
6लख चौरासी चलि आई, कहुँ पलहूँ कल नहिं पाई।
7माया ने हरि बिसराई, गुरुवर ने याद दिलाई।
8माया ने मार लगाई, गुरुवर ने कण्ठ लगाई।
9माया ने प्यास बढ़ाई, गुरुवर ने प्यास बुझाई।
10भवसागर थाह न पाई, गुरु ने भवसिंधु सुखाई।
11शरणागति राह दिखाई, गुरुवर पर बलि बलि जाई।
12जग जनमि जनमि दुख पाई, अब गुरु की लइ शरणाई।
13तू जा “कृपालु” शरणाई, हरि परखत भुज फैलाई।