Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्यामा परिभाषा · पृष्ठ 956
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1साधक परिभाषा गोविंद राधे।
2जो क्षण क्षण मन हरि में लगा दे॥ 11105॥
3कीर्तन परिभाषा गोविंद राधे।
4हरि रूपध्यानयुक्त नाम गुण गा दे॥ 11106॥
5कर्मयोग परिभाषा गोविंद राधे।
6तन जग में मन हरि में लगा दे॥ 11107॥
7योग की परिभाषा गोविंद राधे।
8जामें जीव ब्रह्म संयोग हो बता दे॥ 11108॥
9पुण्य की परिभाषा गोविंद राधे।
10वेद विधि युक्त सत् कर्म बता दे॥ 11109॥
11पाप की परिभाषा गोविंद राधे।
12वेद में निषेध वाले कर्म बता दे॥ 11110॥
13धर्म की परिभाषा गोविंद राधे।
14निज उर हरि गुरु ही को बिठा दे॥ 11111॥