Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सत्संग–कुसंग · पृष्ठ 952
Reading 448 of 452 · Source nos. 11068–11074 · Source PDF 455
1परदोष देखो जनि गोविंद राधे।
2यह दोष मन को सदोष बना दे॥ 11068॥
3परदोष जो भी देखे गोविंद राधे।
4वह है सदोष प्रमाण बता दे॥ 11069॥
5दोषदर्शी को तो गोविंद राधे।
6सर्वत्र दोष ही दीखे बता दे॥ 11070॥
7गुणदर्शी को तो गोविंद राधे।
8सर्वत्र गुण ही दीखे बता दे॥ 11071॥
9दोष देखना ही हो तो गोविंद राधे।
10अपने अनन्त दोष मन को दिखा दे॥ 11072॥
11निंदनीयों में भी गोविंद राधे।
12दुर्भावना कभू हो ना बता दे॥ 11073॥
13सब में हैं श्री कृष्ण गोविंद राधे।
14याते किसी को दुख दे ना बता दे॥ 11074॥