Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
सत्संग–कुसंग · पृष्ठ 943
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2सत अर्थ हरि गुरु गोविंद राधे।
3संग अर्थ मन का लगाव बता दे॥ 10966॥
4हरि हरिभक्त सत् गोविंद राधे।
5शेष सब जगत असत है बता दे॥ 10967॥
6सत्संग मन ते हो गोविंद राधे।
7ज्ञान वैराग्य भक्ति तीनों दिला दे॥ 10968॥
8सच्चा सत्संग हो तो गोविंद राधे।
9श्रद्धा हीन को भी श्रद्धा पैदा करा दे॥ 10969॥
10श्रद्धा सत्संग अरु गोविंद राधे।
11श्री कृष्ण भक्ति तीनों हरि ते मिला दे॥ 10970॥
12सबते बड़ा धन गोविंद राधे।
13गोपी निष्काम प्रेमधन है बता दे॥ 10971॥