लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 865

Reading 363 of 452 · Source nos. 10083–10094 · Source PDF 368

1तब श्रीकृष्ण जी ने गोविंद राधे।

2पतिव्रत उपदेश दिया था बता दे॥ 10083॥

3साथ ही कहा भी था गोविंद राधे।

4घर लौट जाओ यह धर्म है बता दे॥ 10084॥

5गोपीजन उत्तर था गोविंद राधे।

6मन को है तुमने चुराया बता दे॥ 10085॥

7बिनु मन इन्द्रियाँ गोविंद राधे।

8घर का कर्म कैसे करेंगी बता दे॥ 10086॥

9बिनु मन पैर कैसे गोविंद राधे।

10लौटि जायें पुनि घर यह भी बता दे॥ 10087॥

11धर्म तो दो हैं हरि गोविंद राधे।

12एक पर अरु एक अपर बता दे॥ 10088॥

13मात पिता पति आदि गोविंद राधे।

14सब हैं अपर धर्मी दैहिक बता दे॥ 10089॥

15जीव मात पिता पति गोविंद राधे।

16हो एकमात्र कृष्ण तुम ही बता दे॥ 10090॥

17कृष्ण सर्वात्मा हैं गोविंद राधे।

18याते सत्य स्वार्थ कृष्ण प्राप्ति बता दे॥ 10091॥

19शुक ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।

20सब आत्माओं की आत्मा बता दे॥ 10092॥

21जीव की आत्मा कृष्ण गोविंद राधे।

22अतएव कृष्ण भजनीय हैं बता दे॥ 10093॥

23रास तो था अनुचित गोविंद राधे।

24श्रीकृष्ण संबंध उचित बता दे॥ 10094॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

Source edition and PDF · Text version