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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 737

Reading 235 of 452 · Source nos. 8547–8558 · Source PDF 240

1मटुकी फोरे क्यों गोविंद राधे।

2गोरस क्यों ढुरकावे बता दे॥ 8547॥

3देखु देखु चुपके ते गोविंद राधे।

4तेरे पाछे रह मुसकाय बता दे॥ 8548॥

5माधुरी वचन सुनि गोविंद राधे।

6लाल बोले मैया ते तुरत बता दे॥ 8549॥

7हाय हाय इत्तो झूठ गोविंद राधे।

8हौं कब गयो तेरे भवन बता दे॥ 8550॥

9नव लख गाय मेरे गोविंद राधे।

10दूध दही की कहा कमी है बता दे॥ 8551॥

11तेरी सी सैकड़ों हैं गोविंद राधे।

12मेरे घर नौकरानी बता दे॥ 8552॥

13मैया इन सबने ही गोविंद राधे।

14लाज को घोर कर पी लई बता दे॥ 8553॥

15इतने में आई तहँ गोविंद राधे।

16चित्रा सखी कह मैया ते बता दे॥ 8554॥

17सुन ले मैया याकी गोविंद राधे।

18बोलनि चतुरता पूर्ण बता दे॥ 8555॥

19कौन ते ऐसी ऐसी गोविंद राधे।

20बातन को सीखि केबोले बता दे॥ 8556॥

21तेरो यह लाल मैया गोविंद राधे।

22अति ही निपट होत जात है बता दे॥ 8557॥

23हमरे घरन माँहिं गोविंद राधे।

24घुसि करे अचकरी ऐसी बता दे॥ 8558॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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