Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 717
Reading 215 of 452 · Source nos. 8307–8318 · Source PDF 220
1डगर में मिलीं वाय गोविंद राधे।
2श्यामा जू की दासियाँ बता दे॥ 8307॥
3श्यामा जू भी थीं गोविंद राधे।
4साथ, देखा मंजु को पूछा बता दे॥ 8308॥
5अरी वीर मंजु तू गोविंद राधे।
6आज है अकेली क्यों नेकु बता दे॥ 8309॥
7पनघट पै तो कोउ गोविंद राधे।
8इकली नहिं जाया करे है बता दे॥ 8310॥
9तू ना जाने का गोविंद राधे।
10लाल करे डगर लँगरई बता दे॥ 8311॥
11वाकी कुचाल ते तू गोविंद राधे।
12कैसे बचि आई अचम्भो बता दे॥ 8312॥
13मंजु बोली श्यामा जू गोविंद राधे।
14घर में न पानी एक बूँद था बता दे॥ 8313॥
15सोचा मारग में गोविंद राधे।
16कोई सहेली तो मिलेगी बता दे॥ 8314॥
17किन्तु आज जाने क्यों गोविंद राधे।
18कोई सहेली मिली नाहिं बता दे॥ 8315॥
19श्यामा ने कहा वीर गोविंद राधे।
20बड़भागिनि बची लँगर ते बता दे॥ 8316॥
21मंजु ने कहा प्यारी गोविंद राधे।
22वाने कियो बुरा हाल बता दे॥ 8317॥
23घट फोर्यो पट फार्यो गोविंद राधे।
24नैनन कोर ते मार्यो बता दे॥ 8318॥