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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 667

Reading 165 of 452 · Source nos. 7712–7723 · Source PDF 170

1एक ओर सुर लगे गोविंद राधे।

2एक ओर लगे थे असुर बता दे॥ 7712॥

3सुरासुर दोनों ने गोविंद राधे।

4मथा क्षीर सागर को था बता दे॥ 7713॥

5लाला ने कहा मैया गोविंद राधे।

6जैसे तू मथे नित दधि को बता दे॥ 7714॥

7मैया कह हाँ लाला गोविंद राधे।

8कालकूट निकला था सिन्धु ते बता दे॥ 7715॥

9लाला कहे विष तो गोविंद राधे।

10होता है केवल सर्प में बता दे॥ 7716॥

11मैया कह आगे सुनु गोविंद राधे।

12तू तो बार बार मोहिं टोकि दे बता दे॥ 7717॥

13कालकूट विष को तो गोविंद राधे।

14पिया था आशुतोष शिव ने बता दे॥ 7718॥

15विष की बूँदे कछु गोविंद राधे।

16गिर गईं पिया सर्पों ने बता दे॥ 7719॥

17याही ते सर्प हुये गोविंद राधे।

18विषयुक्त सारे जग में बता दे॥ 7720॥

19लाला कह दूध ते गोविंद राधे।

20विष का निक लना अचंभा बता दे॥ 7721॥

21मैया ने कहा उसी गोविंद राधे।

22सिन्धु ते निकला माखन बता दे॥ 7722॥

23याते इस लोंदे में गोविंद राधे।

24थोड़ा सा विष मिला काला बता दे॥ 7723॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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