Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
श्री राधा · पृष्ठ 518
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1जन साधारण के गोविंद राधे।
2सामने नहीं है कथनीय बता दे॥ 6002॥
3कृष्णप्रेमी ब्रह्मवादी गोविंद राधे।
4अरु गुरुभक्त जो वाको बता दे॥ 6003॥
5कृष्ण हैं परमदेव गोविंद राधे।
6षडैश्वर्य परिपूर्ण बता दे॥ 6004॥
7गोप गोपीवृन्द गोविंद राधे।
8करें श्रीकृष्ण की भक्ति बता दे॥ 6005॥
9वृन्दावन स्वामी कृष्ण गोविंद राधे।
10एकमात्र मेरे परमेश्वर बता दे॥ 6006॥
11उनके ही अंश हैं गोविंद राधे।
12विश्वपति श्री महाविष्णु बता दे॥ 6007॥
13वे महाविष्णु तो हैं गोविंद राधे।
14प्रकृति ते प्राचीन नित्य बता दे॥ 6008॥
15उन श्रीकृष्ण की हैं गोविंद राधे।
16शक्तियाँ अनन्त चारों वेद बता दे॥ 6009॥
17ह्लादिनी संधिनी गोविंद राधे।
18ज्ञानेच्छा क्रिया आदि हैं बता दे॥ 6010॥
19कृष्ण की ज्ञान शक्ति गोविंद राधे।
20ही है क्षेत्रज्ञ शक्ति बता दे॥ 6011॥
21कृष्ण की इच्छा शक्ति गोविंद राधे।
22अन्तर्भूत माया शक्ति बता दे॥ 6012॥
23कृष्ण की माया शक्ति गोविंद राधे।
24त्रिगुणमयी बहिरंगा बता दे॥ 6013॥