Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 394
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1रो रो के माँगो प्रेम गोविंद राधे।
2एक दिन रोना रंग लाये बता दे॥ 4568॥
3बनि के अबोध शिशु गोविंद राधे।
4हरि ते ही माँगो प्रेम बता दे॥ 4569॥
5हरि तो निरन्तर गोविंद राधे।
6तव उर संकल्प देखें बता दे॥ 4570॥
7मेरे कर्म हरि गुरु गोविंद राधे।
8देख रहे हैं विश्वास करा दे॥ 4571॥
9काषायवस्त्र ते ना गोविंद राधे।
10भोजनादि नियम ते हरि मिलें ना बता दे॥ 4572॥
11मौन या प्रवचन ते गोविंद राधे।
12वनवास ते ना हरि मिलते बता दे॥ 4573॥
13सच्चा है मौन सोई गोविंद राधे।
14जामें न जाये मन जग में बता दे॥ 4574॥
15सच्चा एकान्त सोई गोविंद राधे।
16जामें मन सदा रहे कृष्ण में बता दे॥ 4575॥
17सच्चा वैराग्य सोई गोविंद राधे।
18मन नित्य अनुरक्त कृष्ण में बता दे॥ 4576॥
19सच्चा है तप सोई गोविंद राधे।
20जामें हरि विरह की आग जला दे॥ 4577॥
21निष्काम आँसू ते ही गोविंद राधे।
22श्यामा श्याम पिघलें मिलें भी बता दे॥ 4578॥
23आँसू बहाये जा गोविंद राधे।
24एक दिन आँसू तोहिं हरि ते मिला दे॥ 4579॥