Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 388
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1एक बार सूरदास गोविंद राधे।
2कृष्ण नाम गाते जा रहे थे बता दे॥ 4496॥
3औचक सूरदास गोविंद राधे।
4गिर गये जल भरे कुएँ में बता दे॥ 4497॥
5सूर ने सोचा मन गोविंद राधे।
6जिसने गिराया सो निकाले बता दे॥ 4498॥
7आये तत्काल कृष्ण गोविंद राधे।
8हाथ को बढ़ाया माया ते बता दे॥ 4499॥
9सूर को निकाला अरु गोविंद राधे।
10हाथ छुड़ा के गये भाग बता दे॥ 4500॥
11सूर ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।
12उर ते भागो मानूँ मर्द बता दे॥ 4501॥
13यह है भक्तों का गोविंद राधे।
14दृढ़ अरु सत्य संकल्प बता दे॥ 4502॥
15हरि ने दिया आँख गोविंद राधे।
16सूर को उर ते लगाया बता दे॥ 4503॥
17सूर ने कहा कृष्ण गोविंद राधे।
18देख लिया पुनि मोहिं सूर बना दे॥ 4504॥
19पूर्ण विश्वास रखो गोविंद राधे।
20एक दिन मेरा मन लगेगा बता दे॥ 4505॥
21कभु राधे कभु श्याम गोविंद राधे।
22बारी बारी ते दोनों के गुन गा दे॥ 4506॥
23हरि में लगा दे मन गोविंद राधे।
24जग में जो हटि आवे फिर ते लगा दे॥ 4507॥