Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
भक्ति · पृष्ठ 386
Reading 397 of 516 · Source nos. 4472–4483 · Source PDF 403
1अशुद्ध मन को ही गोविंद राधे।
2हरि नाम गुण लीला भाये ना बता दे॥ 4472॥
3ज्योँ ज्योँ मन शुद्ध होगा गोविंद राधे।
4त्योँ त्योँ हरि नाम गुण भायेगा बता दे॥ 4473॥
5कामुक को ही जैसे गोविंद राधे।
6कामिनी में मिले सुख प्रमुख बता दे॥ 4474॥
7ऐसे शुद्ध मन को गोविंद राधे।
8श्याम प्रेम में सुख प्रमुख बता दे॥ 4475॥
9मन बड़ा बलशाली गोविंद राधे।
10बड़े बड़े ज्ञानी ध्यानी को भी हरा दे॥ 4476॥
11सुगम अशन अग्नि गोविंद राधे।
12विषम है मन का निग्रह बता दे॥ 4477॥
13मन बड़ा चंचल गोविंद राधे।
14अभ्यास वैराग्य वश में करा दे॥ 4478॥
15मन ते न हार मानो गोविंद राधे।
16हरि नाम रूप लीला गुण में लगा दे॥ 4479॥
17हरि नाम गुण लीला गोविंद राधे।
18कोई भी गा दे मन हरि में लगा दे॥ 4480॥
19हरि नाम गुण लीला गोविंद राधे।
20गावे न गावे मन हरि में लगा दे॥ 4481॥
21माना मन चंचल गोविंद राधे।
22मन ते भी चंचल श्याम ते मिला दे॥ 4482॥
23मन वश में ना होगा गोविंद राधे।
24हरि नाम रूप लीला गुण में लगा दे॥ 4483॥