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Radha Govind Geet Part 1

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

भक्ति · पृष्ठ 353

Reading 364 of 516 · Source nos. 4076–4087 · Source PDF 370

1आत्म निवेदन ते गोविंद राधे।

2नृप बलि ने लक्ष्य पाया बता दे॥ 4076॥

3उपर्युक्त भक्तों को गोविंद राधे।

4एक ही भक्ति लक्ष्य प्राप्त करा दे॥ 4077॥

5नारद भक्ति सूत्र गोविंद राधे।

6भक्ति के ग्यारह प्रकार बता दे॥ 4078॥

7गुरुमाहात्म्यासक्ति गोविंद राधे।

8रूपासक्ति अरु पूजासक्ति बता दे॥ 4079॥

9स्मरण आसक्ति गोविंद राधे।

10दास्यासक्ति अरु सख्यासक्ति बता दे॥ 4080॥

11कान्त आसक्ति गोविंद राधे।

12वात्सल्य आसक्ति भक्ति बता दे॥ 4081॥

13आत्म निवेदन गोविंद राधे।

14तन्मयतासक्ति भक्ति बता दे॥ 4082॥

15परमविरहासक्ति गोविंद राधे।

16भक्ति एक रूप हैं ग्यारह बता दे॥ 4083॥

17भक्ति है अनेक विधि गोविंद राधे।

18सबते प्रमुख है स्मरण बता दे॥ 4084॥

19स्मरण युक्त सासंग गोविंद राधे।

20स्मरण बिनु अनासंग भक्ति बता दे॥ 4085॥

21स्मरण की पाँच कोटि गोविंद राधे।

22स्मरण धारणा अरु ध्यान बता दे॥ 4086॥

23चौथी ध्रुवानुस्मृति गोविंद राधे।

24पाँचवीं है कोटि समाधि बता दे॥ 4087॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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