Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
योग · पृष्ठ 214
Reading 225 of 516 · Source nos. 2429–2440 · Source PDF 231
1कर्म फल तो विपाक गोविंद राधे।
2नाना वासना को योग आशय बता दे॥ 2429॥
3योग है कठिन अति गोविंद राधे।
4योग जोग कलि में ना कोउ बता दे॥ 2430॥
5योग में हैं अष्टांग गोविंद राधे।
6कलि में तो योग असम्भव बता दे॥ 2431॥
7आठ में है एक अंग गोविंद राधे।
8आसन वाको लोग योग बता दे॥ 2432॥
9यम नियम आसन गोविंद राधे।
10प्रत्याहार प्राणायाम बता दे॥ 2433॥
11ध्यान धारणा समाधि गोविंद राधे।
12योग मार्ग के आठ अंग बता दे॥ 2434॥
13यम तो हैं बारह गोविंद राधे।
14नियम भी हैं बारह ही बता दे॥ 2435॥
15सत्य, अहिंसा, मौन गोविंद राधे।
16अस्तेय, लज्जा, क्षमा यम हैं बता दे॥ 2436॥
17ब्रह्मचर्य, आस्तिकता गोविंद राधे।
18असंगता असंचय यम हैं बता दे॥ 2437॥
19स्थिरता अरु अभय गोविंद राधे।
20इस प्रकार यम हैं बारह बता दे॥ 2438॥
21शौच, जप, तप, यज्ञ गोविंद राधे।
22श्रद्धा अतिथि सेवा नियम बता दे॥ 2439॥
23हरिपूजा, तीर्थयात्रा गोविंद राधे।
24परोपकार चेष्टा नियम बता दे॥ 2440॥