Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 212
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1जिस ज्ञान, योग ते भी गोविंद राधे।
2पिय सुख पावे ज्ञान, योग है बता दे॥ 2421॥
3हरि हित कर्म अरु गोविंद राधे।
4हरि हित ज्ञान हरि प्रेम दिला दे॥ 2422॥