Skip to main contentJagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
कर्म · पृष्ठ 189
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2ऊधो तो माधो के गोविंद राधे।
3सदा ते हैं नित्य पार्षद बता दे॥ 2151॥
4जीव कल्याण हित गोविंद राधे।
5ऊधो पूछें माधो ते प्रश्न बता दे॥ 2152॥
6प्रश्न था श्रेय के गोविंद राधे।
7मार्ग क्यों अनेकों बन गये बता दे॥ 2153॥
8उन मार्गों में गोविंद राधे।
9कौन सत्य कौन असत्य बता दे॥ 2154॥
10आपने भक्ति को ही गोविंद राधे।
11कहा निरपेक्ष स्वतंत्र बता दे॥ 2155॥
12भगवान श्रीकृष्ण गोविंद राधे।
13बोले सुनो प्रिय ऊधो बता दे॥ 2156॥