Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
संसार · पृष्ठ 111
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2यह संसार वृक्ष गोविंद राधे।
3प्रवाह रूप से है नित्य बता दे॥ 1249॥
4यह संसार वृक्ष गोविंद राधे।
5सदा सदा ते ही रहा है बता दे॥ 1250॥
6संसार वृक्ष के तो गोविंद राधे।
7दो बीज पाप अरु पुण्य बता दे॥ 1251॥
8संसार वृक्ष के तो गोविंद राधे।
9फल फूल मोक्ष अरु भोग बता दे॥ 1252॥
10संसार वृक्ष की तो गोविंद राधे।
11वासना असंख्य जड़ सम है बता दे॥ 1253॥
12संसार वृक्ष के तो गोविंद राधे।
13सत्व रज तम गुण तने हैं बता दे॥ 1254॥