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जगद्गुरु-आदेश
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1जगद्गुरु-आदेश
2श्री कृष्ण का माधुर्य-भाव युक्त निष्काम प्रेम
3प्राप्त कर उनकी नित्य सेवा ही तुम्हारा लक्ष्य है।
4वह दिव्य निष्काम प्रेम, गुरुकृपा द्वारा
5अंतःकरण-शुद्धि होने पर ही प्राप्त होगा।
6वह अंतःकरण शुद्धि, गुरु द्वारा निर्दिष्ट
7साधना द्वारा ही संभव है।
8साधना - श्री राधाकृष्ण का रूपध्यान करते हुये
9(स्वेच्छा से बनाये हुये रूप में दिव्य-भावना रखना है)
10रोकर उनके नाम गुण लीलादि का संकीर्तन करो।
11सदा श्रीकृष्ण को अपने साथ ही मानो।
12मोक्ष पर्यन्त की कामना छोड़कर, केवल दिव्य
13शुद्ध प्रेम की कामना से ही प्रेम करो।
14“वे ही मेरे हैं”, इस भावना को निरंतर दृढ़ करो,
15एवं श्याममिलन की परमव्याकुलता पैदा करो।
16परदोष दर्शनादि कुसंगों से बचो।
17मानवदेह का प्रत्येक क्षण अमूल्य मानो।
18- मैं सदा तुम्हारा सहायक हूँ - तुम्हारा
19कृपालु