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Shri Radha Trayodashi

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वृषभानुनन्दिनी रासेश्वरी

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1वृषभानुनन्दिनी रासेश्वरी

2श्री राधारानी के प्रेमरस सार

3स्वरूप विग्रह का

4सांगोपांग चित्रण अत्यन्त ही

5आकर्षक एवं अनूठे

6ढंग से किया गया है।

7इसमें १३ पद हैं।

8प्रत्येक पद में मधुरातिमधुर

9प्रेम रस धारा प्रवाहित हो रही है जो

10श्री राधारानी के रूपध्यान

11के लिए परम सहायक है।

12अतः भक्ति मार्गीय प्रत्येक साधक

13के लिए परम उपयोगी है।

Thirteen source-numbered Radha verses with published Hindi meanings from the supplied Hindi source. Numbering and contributor credits remain edition-specific. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : गुरुपूर्णिमा, ११ जुलाई, २००६.

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