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Shri Radha Trayodashi

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

किशोरी सिर शीशफूल बलिहार।

Reading 13 of 20 · Radha · Source no. 9 · Source PDF 21–22

1९.

2किशोरी सिर शीशफूल बलिहार।

3गुम्फित सुमन सुघर वेणी की, लटकनि छवि छविदार।

4गिरि जमुनोत्री से जैसे गिर, जमुना जू की धार।

5जगमग जगमग जगमगात अति, कनक मुकुट रिझवार।

6ऊपर ते चन्द्रिका चमक लखि, इन्द्र धनुष दऊँ वार।

7उत ‘कृपालु’ सिन्दूर अरुणिमा, मोहति नन्दकुमार।

8भावार्थ: मैं भानुनन्दिनी श्री राधा के शिरोभाग पर आरूढ़ शीशफूल पर

9बलिहार जाता हूँ। पुष्पों सहित गुँथी हुई सुन्दर वेणी की लटकने की छवि

10अत्यन्त मनोहर है। पृष्ठ भाग पर लटकी हुई वेणी ऐसी प्रतीत होती है

11मानो यमुनोत्री पर्वत से श्री यमुना की धारा नीचे गिर रही है। रसिकों के

12मन को मोह लेने वाला स्वर्ण का मुकुट मस्तक पर जगमग-जगमग

13जगमगा रहा है। मुकुट की चन्द्रिका की दीप्ति पर इन्द्रधनुष को न्यौछावर

14किया जा सकता है। श्री ‘कृपालु जी’ कहते हैं कि श्री राधा के सीमन्त के

15सिन्दूर की लालिमा लाल के प्रेमी मन को मोहित कर लेती है।

Thirteen source-numbered Radha verses with published Hindi meanings from the supplied Hindi source. Numbering and contributor credits remain edition-specific. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : गुरुपूर्णिमा, ११ जुलाई, २००६.

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