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Krishna Dwadashpadi

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

श्याम को भाल विशाल निहार।

Reading 7 of 13 · Krishna · Source no. 6 · Source PDF 12–13

1६

2श्याम को भाल विशाल निहार।

3कस्तूरी को तिलक भाल पर, शोभित छवि छविदार।

4पुनि बहुरंगी मुकुट चमक ते, चमकत नील लिलार।

5इनमें नीलो भाल चमक मिलि, अद्भुत छवि बलिहार।

6तिलक, मुकुट अरु भाल चमक दुति, को ताण्डव अनुहार।

7सब ‘कृपालु’ श्रृंगार अलौकिक, चिदानन्दमय धार।

8भावार्थ:-किसी सखी ने अपनी अभिन्न सखी को श्रीकृष्ण के

9विशाल भाल को दिखाते हुए कहा-अरी सखी ! देख तो सही-

10कृष्ण का मस्तक कितनी अपूर्व शोभा को प्राप्त हो रहा है। कस्तूरी

11का तिलक मस्तक की श्रीवृद्धि कर रहा है। श्याम का नील वर्ण का

12मस्तक मुकुट के विविध रंगों के रत्नों की आभा से प्रकाशित हो

13उठा है। मस्तक के नील वर्ण की द्युति ने कुंडलों की दमक से

14मिलकर एक विचित्र शोभा प्राप्त की है। श्याम के मस्तक पर

15कस्तूरी के तिलक की कृष्ण चमक, मुकुट की इन्द्रधनुषी आभा

16एवं मस्तक की स्वयं की नील वर्ण की कान्ति सम्मिलित होकर

17ताण्डव-नर्तन सा कर रही हैं। सन्त कहते हैं-कृष्ण का श्रृंगार

18उनके समान ही अलौकिक चिदानंदमय है।

Twelve complete source-numbered Krishna verses and their published Hindi meanings from the supplied 25-page Hindi source. This edition contains verse 6, which is absent from the supplied combined English scan.

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