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Krishna Dwadashpadi

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

अनुपम नीलो तनु सरकार।

Reading 3 of 13 · Krishna · Source no. 2 · Source PDF 4–5

1२

2अनुपम नीलो तनु सरकार।

3कोउ कह इन्द्रनील मणि सम कोउ, नील जलद अनुहार।

4कोउ कह नील कमल सम नीलो, तनु छवि नन्द कुमार।

5इन तीनों का पृथक पृथक है, गुण बुध करहु विचार।

6याते इन तीनों के गुण का, मिश्रण करु तैयार।

7पुनि उसमें मिश्रण करु चिन्मय, प्रेम सुधा रससार।

8कह ‘कृपालु’ तनु उपमा अस जस, तनु वृषभानु दुलार।

9भावार्थ:-भक्तों के आराध्य नन्दनन्दन का नीले रंग का देह अनुपमेय

10है। किसी भक्त ने उनके नीले रंग को इन्द्र नीलमणि एवं किसी ने

11नीले मेघ के समान बताया है। किसी रसिक ने कहा कि नंदनन्दन

12का शरीर नील कमल के समान छविमान है। इन्द्र नीलमणि, मेघ

13एवं नीलकमल इन तीनों में पृथक पृथक गुण हैं। इन्द्र नीलमणि में

14कान्ति है, स्निग्धता है, नीला रंग है। मेघ गम्भीर होता है, तापनाशक

15होता है, सरस होता है, नीला भी है। नीलकमल नीला है, शीतल

16है, कोमल है, सुगन्धित है। इन तीनों के समस्त गुणों का एक

17मिश्रण तैयार कर उस मिश्रण में दिव्य प्रेमामृत के सार को भी मिला

18दिया जाय तब कुछ कुछ उपमा नंदनन्दन के नीलवर्ण की दी जा

19सकती है।

20‘कृपालु’ कहते हैं-वस्तुतः श्री कृष्ण के चिन्मय वपु की तुलना श्री

21राधा के दिव्य शरीर से ही की जा सकती है।

Twelve complete source-numbered Krishna verses and their published Hindi meanings from the supplied 25-page Hindi source. This edition contains verse 6, which is absent from the supplied combined English scan.

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