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Dainik Prarthana

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj — source heading श्री जगद्गुरु मुखारविन्द से (PDF36–37)

श्री जगद्गुरु मुखारविन्द से

Reading 21 of 21 · Source PDF 36–37

1श्री जगद्गुरु मुखारविन्द से

2जिस दिन किसी जीव को यह दृढ़ विश्वास हो जायगा कि

3भगवान् और भगवान् का नाम एक ही हैं, दोनों में एक सी

4शक्तियाँ हैं, एक से गुण हैं, उसी क्षण उसको भगवत्प्राप्ति हो

5जायेगी। स्वर्ण अक्षरों में लिख लो। भगवान् की इतनी बड़ी कृपा

6है कि वे कहते हैं कि मैं सर्वव्यापक हूँ, तू इसको मानता नहीं है,

7मैं गोलोक में रहता हूँ वहाँ तुम आ नहीं सकते, मैं तुम्हारे

8अन्तःकरण में तुम्हारे साथ बैठा हूँ इसका तुम्हें ज्ञान नहीं है,

9इसलिये लो मैं अपने नाम में अपने आपको बैठा देता हूँ। नाम में

10मैं मूर्तिमान बैठा हुआ हूँ, जिस दिन यह बात तुम्हारे मन में बैठ

11जायगी, उस दिन फिर एक नाम भी जब लोगे, जब एक बार

12राधे कहोगे तो कहा नहीं जायगा, वाणी रुक जायगी, मन डूब

13जायगा, कंठ गद्गद हो जायगा। फिर भगवत्प्राप्ति में क्या देर

14होगी? गुरु कृपा में क्या देर होगी? केवल इसी वचन पर

15विश्वास कर लो।

16तुम्हारा

17कृपालु

Hindi and Sanskrit daily-prayer anthology, transcribed in its printed section order. It includes scriptural passages and selections by other saints; the title-page credit does not establish sole authorship of every passage. No separate English edition is inferred. Supplied edition: द्वितीय संस्करण : मई 2010. Publisher: राधा गोविन्द समिति.

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