Dainik Prarthana — source anthology; see printed contributor credits
पद्मा माँ की आरती
Reading 13 of 21 · Source PDF 24–25
1पद्मा माँ की आरती
2आरती माँ पद्मा की कीजै।
3जय जय जय जगदम्बा की जै॥
4लीलापुर में जनम लियो है,
5रामकृपालुहिं वरण कियो है।
6धन्य धन्य मनगढ़ धरणि जहँ,
7सद्गुरु दम्पति वास कियो है।
8मनगढ़ धाम वास मोहिं दीजै,
9जय जय जय जगदम्बा की जै।
10माँग सिन्दूर अरुणिमा सोहत,
11बिन्दी लाल भाल मन मोहत।
12अनुपमेय माधुर्य गौर तनु,
13जगद्गुरु हिँ मन मोह लियो है।
14मोहूँ दोउ चरणन रज दीजै,
15जय जय जय जगदम्बा की जै॥
16नीली साड़ी जरद किनारी,
17ता पै कंचुकि की छवि न्यारी।
18कानन करण फूल हीरन को,
19कंठी गल पिय चित्र छयो है।
20मोहूँ दोउ अपनो करि लीजै,
21जय जय जगदम्बा की जै॥
22माँ मूरत निष्काम प्रेम की,
23धर्म पतिव्रत अचल नेम की।
24तुम्हरिहिं अनुकम्पा गुरु वर ने,
25निज सेवा सौभाग्य दियो है।
26मोहूँ दोउ सेवा वर दीजै,
27जय जय जय जगदम्बा की जै॥