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प्राक्कथन
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1प्राक्कथन
2प्राक्कथन लिखने की प्रथा है अतएव कतिपय शब्दों द्वारा वह
3लिख रहा हूँ।
4कुछ साधक श्री कृष्ण के ही भक्त होते हैं एवं कुछ साधक
5राधारानी के ही भक्त होते हैं। साथ ही दोनों में भेदभाव रखते
6हैं यह नामापराध है।
7वस्तुतः राधाकृष्ण एक ही तत्व है। पूर्व संस्कार के अनुसार
8किसी में अधिक अनुराग हो सकता है। किन्तु यह ध्यान रखना
9चाहिये कि दोनों सदा एक हैं। इस दृष्टि से राधाकृष्ण दोनों के
10पचास-पचास पदों का शतक बनाया है। यह स्वांतः सुखाय
11ही है।
12जगद्गुरु ः कृपालुः