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Yugal Shatak

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प्रकाशकीय

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1प्रकाशकीय

2ब्रजरस में सराबोर करने वालायुगल-शतकएक अद्वितीय

3एवं अनुपमेय ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में श्री कृष्ण के पचास पद

4तथा श्री राधारानी के पचास पद संकलित किये गये हैं। कृपा

5स्वरूपा राधारानी के दिव्य धाम बरसाना में जगद्गुरु श्री कृपालु

6जी महाराज द्वारा यह अमूल्य निधि प्राप्त हुई। इन पदों में

7निहित रस का रसास्वादन तो कोई रसिक ही कर सकता है

8फिर भी पाठक पढ़ने के बाद अनुभव करेंगे, ऐसा रस कभी

9नहीं मिला। श्री महाराज जी जब नया पद सुनाते हैं तो मूर्तिमान

10रस ही प्रतीत होते हैं। ऐसा लगता है मानो वह रस भी हैं और

11रसास्वादक भी।

12प्रज्ञा चक्षु वालों के लिए भी और ब्रज रस पिपासु भावुक भक्तों

13के लिये भी यह ग्रन्थ अत्यधिक उपयोगी है; क्योंकि इन पदों

14में केवल लीला-माधुरी और शृंगार माधुरी ही नहीं है, सिद्धान्त

15पक्ष का भी समावेश है।

16तृतीय संस्करण — प्रकाशक

17शरत्पूर्णिमा 17, अक्टूबर, 2005

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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