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Yugal Shatak

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

जाने तोहिं तू राधे, राधे मेरी राधे।

Reading 63 of 112 · Source no. 51 · Source PDF 114–115

1जाने तोहिं तू राधे, राधे मेरी राधे।

2कोटि शारदाहूँ नहिं राधे,

3जानि सकैं तोहिं राधे, राधे मेरी राधे।

4विधि हरि हर हूँ हारे राधे,

5जाने नहिं तोहिं राधे, राधे मेरी राधे।

6श्यामहुँ नहिं जाने तोहिं राधे,

7अगनित तनु धरि राधे, राधे मेरी राधे।

8बनीँ ऋचन नारी तव राधे,

9दासिन दासी राधे, राधे मेरी राधे।

10पुनि वे ऋचन जान कस राधे,

11तुम्हरी महिमा राधे, राधे मेरी राधे।

12साँचु कहूँ तो तुमहूँ राधे,

13पाव अंत नहिं राधे, राधे मेरी राधे।

14तुम्हरी कृपा कोर ते राधे,

15जाने कोउ तोहिं राधे, राधे मेरी राधे।

16कृपा चहत जो तुम्हरी राधे,

17पाव कृपा सोइ राधे, राधे मेरी राधे।

18सब पर कृपा यदपि श्री राधे,

19रहत सदा तव राधे, राधे मेरी राधे।

20चाह “कृपालु” बढ़ै जब राधे,

21पाव कृपा तब राधे, राधे मेरी राधे॥

22भावार्थ—भक्त अपनी स्वामिनी श्रीराधा के प्रति कहता है-हे

23श्रीराधे! तुम्हें तुम्हारे अतिरिक्त दूसरा और कौन जान सकता है?

24करोड़ों सरस्वती भी अपने बुद्धि-बल से तुम्हें जानने में असमर्थ

25ही सिद्ध होंगी। ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव भी तुम्हारी महिमा का ओर

26छोर नहीं पा सके। तुम्हारे प्रियतम श्यामसुन्दर अनेक रूप धारण

27कर भी तुम्हारे मर्म को नहीं पा सके। वेद की ऋचाओं ने गोपी

28रूप धारण कर तुम्हारी दासियों का दासत्व स्वीकार किया; अतः वे

29ऋचाएँ भी तुम्हारी गरिमा का ज्ञान कैसे प्राप्त कर सकती थीं?

30सत्य तो यह है कि तुम स्वयं भी अपनी लीला का आदि अन्त नहीं

31पा सकती हो। हे राधे! तुम्हारी किंचित् कृपा-दृष्टि के बल से ही

32कोई तुम्हें किंचित् समझ सका है। जो तुम्हारी कृपा के लिये सदैव

33लालायित रहता है, वही तुम्हारी कृपा को प्राप्त करने का वास्तविक

34अधिकारी है। यद्यपि तुम तो समान रूप से सभी पर कृपा करती

35हो। श्री कृपालुजी कहते हैं- जब साधक उस कृपा को प्राप्त करने

36के लिये विशेष रूप से उत्कंठित होता है, तभी वह तुम्हारे कृपा-

37कटाक्ष का अनुभव प्राप्त करता है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version