लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Ras

Source edition — see contributor credits

प्राक्कथन

Reading 5 of 119 · Source PDF 6

1प्राक्कथन

2पुस्तक के नाम से ही पुस्तक का विषय स्पष्ट हो जाता

3है। समस्त वेदों, शास्त्रों, पुराणों आदि के द्वारा यह निर्विवाद

4सिद्ध सिद्धान्त है कि प्रत्येक जीव का चरम लक्ष्य आनन्द प्राप्ति

5ही है और वह आनन्द या रस स्वयं रसिक शिरोमणि परब्रह्म

6श्रीकृष्ण ही हैं यथा“रसो वै सः” “आनन्दो ब्रह्मेति व्यजानात्”

7आदि। वस्तुतः महाभावरूपा महाशक्ति राधा एवं सर्वशक्तिमान

8भगवान् श्रीकृष्ण एक ही हैं। अतःयुगल रसपुस्तक में मैंने श्री

9राधाकृष्ण दोनों की ही मधुरातिमधुर दिव्य लीलाओं का निरूपण

10किया है साथ ही भक्ति सम्बन्धी शास्त्रीय सिद्धान्तों को भी पदों

11के माध्यम से प्रकट किया है जिससे भगवदनुरागीजन साध्य

12शिरोमणि श्री राधाकृष्ण दिव्य प्रेम प्राप्ति के सर्वश्रेष्ठ साधन

13श्रवण, कीर्तन एवं स्मरण भक्ति का अभ्यास सहज रूप में,

14सरलता से कर सकें। यदि किसी को कुछ लाभ न भी प्राप्त हो

15तो इसे स्वान्तःसुखाय ही समझियेगा।

16जगद्गुरुः कृपालुः

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version