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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

हैँ अस ग्वालिनि मैया, मैया मैया मैया।

Reading 76 of 119 · Source no. 65 · Source PDF 138–140

1हैँ अस ग्वालिनि मैया, मैया मैया मैया।

2जैसी नहिं कहुँ जग महँ मैया,

3भईं न ह्वैहैं मैया, मैया मैया मैया।

4बोलतिं मधुर बैन उर मैया,

5कपट कतरनी मैया, मैया मैया मैया।

6इत को आ लाला कह मैया,

7जब जावूँ तो मैया, मैया मैया मैया।

8कहतिं दुहा दे गैया मैया,

9घर न मोर पति मैया, मैया मैया मैया।

10दुहि के दूध दऊँ जब मैया,

11कहतिं दूध कम मैया, मैया मैया मैया।

12पुनि कह तू ही पी गयो मैया,

13कितनी झूठीं मैया, मैया मैया मैया।

14नव लख धेनु हमारे मैया,

15दूध पिवूँ कत मैया, मैया मैया मैया।

16भारी गोबर टोकरि मैया,

17मोहिं उठवावतिं मैया, मैया मैया मैया।

18मोहिं कह झूठ दऊँगी मैया,

19माखन लोँदा मैया, मैया मैया मैया।

20पुनि कह नाच दिखा दे मैया,

21तब दउँ माखन मैया, मैया मैया मैया।

22नाचि नाचि हौँ थकि गयों मैया,

23इन कठोर उर मैया, मैया मैया मैया।

24आयेहु लाल कालि पुनि मैया,

25तब दउँ माखन मैया, मैया मैया मैया।

26हौँ “कृपालु” अति निर्बल मैया,

27ये सब धींगरि मैया, मैया मैया मैया॥

28भावार्थ—श्यामसुन्दर मैया यशोदा से ब्रजगोपियों की

29शिकायत करते हुए कहते हैं- अरी मैया! इन गोपियों के समान

30ढीठ स्त्रियाँ तो संसार में न कहीं हुई हैं न भविष्य में होंगी। मोर

31की भाँति इनकी वाणी अत्यन्त मधुर है किंतु हृदय में कपट

32भरा है। पहले यह मुझे प्र्रेम से अपने घर बुलाती हैं, जब मैं

33इनके निकट जाता हूँ तब कहती हैं- मेरा पति घर पर नहीं है,

34लाला! मेरी गैया दुह दो। जब मैं इनकी गाय दुहकर दूध देता

35हूँ तब कहती हैं- आज दूध कम है। फिर कहती हैं- कन्हैया!

36तुमने गाय दुहते हुए ही दूध पी लिया है, ये कितनी झूठी हैं!

37मैया! हमारे घर में नौ लाख गायें हैं, मैं इनकी गाय का दूध

38क्यों पीऊँगा? कभी ये गोबर की भरी टोकरी मुझसे उठवाती

39हैं- ये कहती हैं- मैं माखन का लौंदा दूँगी। जब गोबर की

40टोकरी उठवाकर मैं माखन माँगता हूँ तब कहती हैं- नाचो तब

41माखन मिलेगा। मैं नाचते नाचते थक गया परन्तु इस गोपी ने

42मुझे माखन नहीं दिया। कहने लगीं-कल आना तब माखन

43दूँगी। इनका हृदय कितना कठोर है!“कृपालु”के शब्दों में

44कन्हैया मैया से कहते हैं- मैं तो छोटा हूँ दुर्बल भी हूँ, ये बड़ी

45हैं, अतः मैं इनसे कैसे जीत सकता हूँ।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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