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Yugal Ras

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

जाने का कै गयो कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

Reading 65 of 119 · Source no. 54 · Source PDF 117–119

1जाने का कै गयो कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

2मिल्यो यमुन तट नटखट कान्हा,

3टेर्यो मुरलिहिँ कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

4सुनत टेर देख्यों मुरि कान्हा,

5लखत बिकी कर कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

6मार्यो नैन बान अस कान्हा,

7गिरी कहत हा कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

8पुनि मो कहँ उठाय कर कान्हा,

9उर लगाय लिये कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

10निज मुख लाय कान कह कान्हा,

11ले बनाय पिय कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

12हौँ हूँ उर लगाय लिय कान्हा,

13लियो लूटि मोहिं कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

14अब तो मदन विमोहन कान्हा,

15बिसरत नहिं छिन कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

16कैसेहुँ घट भरि उर धरि कान्हा,

17गइ घर सुमिरत कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

18दरस परस रस अस दिये कान्हा,

19जित देखूँ तित कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा।

20यार “कृपालु” जार पिय कान्हा,

21चुप रहु धरु उर कान्हा, कान्हा कान्हा कान्हा॥

22भावार्थ—अनुभवी भक्त अपने साथ हुई घटना का

23वर्णन करते हुए कहता है- न जाने कृष्ण ने मेरे ऊपर कैसा

24जादू कर दिया। एक दिन यमुना के किनारे चंचल कृष्ण मुझे

25मिला था। उसने मुझे देखकर मुरली की तान छेड़ दी। मैंने

26मुरली-ध्वनि सुनकर मुड़कर उस ध्वनि के उद्गम की ओर

27देखा। देखते ही मैं उस नटखट के हाथों बिना मूल्य के ही

28बिक गई। उस चपल कृष्ण ने ऐसे कटाक्ष बाण छोड़े कि मैं हा

29कृष्ण! कहकर पृथ्वी पर गिर पड़ी। उस रसिकशेखर ने मुझे

30अपने कोमल करों से उठाकर हृदय से लगा लिया मेरे कानों से

31मुख लगाकर उसने कहा- मुझे अपना प्रियतम बना ले! मैंने

32भी नागर कृष्ण को तत्क्षण अपने हृदय से लगा लिया। कृष्ण ने

33तो मेरा सर्वस्व ही लूट लिया। कामदेव को भी मोहित करने

34वाली कृष्ण की रूप माधुरी अब पल भर को भी मेरे हृदय से

35पृथक् नहीं होती। जैसे तैसे मैंने यमुना-जल से घड़ा भरकर

36सिर पर रखा। हृदय में परम प्रियतम कृष्ण को धारण कर घर

37पहुंँची। नन्दनन्दन के दर्शन एवं स्पर्श का रस ऐसा अलौकिक

38था कि अब जिधर देखती हूँ वे ही दिखाई देते हैं।जित देखूँ

39तित श्याममयी है“कृपालु”कहते हैं- हे सखी! यह जार प्रेम

40की बात किसी से कहना मत। अपने प्रियतम को हृदय में ही

41धारण कर।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

Source edition and PDF · Text version