लोड हो रहा है…लोड हुँदैछ…
Skip to main content
Yugal Madhuri

Source edition — see contributor credits

प्राक्कथन

Reading 5 of 75 · Source PDF 6

1प्राक्कथन

2हरेर्नामैव नामैव नामैव मम जीवनम्।

3कलौ नास्त्येव नास्त्येव नास्त्येव गतिरन्यथा॥

4कलियुग में भगवन्नाम, गुण, लीलादि संकीर्तन ही

5भगवत्प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है। “युगल माधुरी” दिव्य

6युगल श्री राधा कृष्ण के नाम, गुणादि से सम्बन्धित

7संकीर्तनों का संग्रह है। भुक्ति एवं मुक्ति की कामनाओं से

8रहित होकर, हरि गुरु का रूपध्यान करते हुये, उनसे

9अत्यन्त दीनतापूर्वक, रोकर, दिव्य प्रेम की याचना करने

10से ही अंतःकरण शुद्ध होगा। तब गुरु-कृपा से दिव्य प्रेम

11की प्राप्ति होगी, जिससे श्री राधा-कृष्ण की नित्य सेवा

12का अधिकारी बन कर जीव सदा-सदा के लिये कृतार्थ

13हो जायगा। उसी लक्ष्य को लेकर ये सब संकीर्तन बनाये

14गये हैं।

15जगद्गुरु कृपालु महाराज

Original Hindi songs from the supplied standalone Yugal Madhuri edition. This is distinct from Prem Ras Madira's similarly named chapter. Frontmatter retains its own source credits. Supplied edition: Fifth edition, Gita Jayanti, 28 November 2009.

Source edition and PDF · Text version