Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
राधे राधे गोविंद गोविंद राधे,
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1(जिया नहिं जाय अब...)
2राधे राधे गोविंद गोविंद राधे,
3भूलो जनि दोउन पल छिन आधे।
4तव सोइ साँचो पिय मन को बता दे,
5जग सुख भ्रम लखि मन को हटा दे।
6हरि गुरु चरनन मन को लगा दे,
7हरि गुरु रूपध्यान मन ते करा दे।
8तन का भरोसा नहिं मन को बता दे,
9जाने कब यम निज दूत पठा दे।
10सत्व रज तम गुण सुख बिसरा दे,
11पाँचों मुक्ति कामना को मन ते भुला दे।
12निज सुख कामना को मन ते भुला दे,
13हरि कामना को निज कामना बना दे।
14तेरे सब कछु हरि मन को बता दे,
15निज उर हरि विरहाग लगा दे।
16जित जाये मन तित हरि को बिठा दे,
17दोनों हैं “कृपालु” पिय प्यारी समुझा दे।