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Radha Govind Geet Part 2

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

लीला माधुरी · पृष्ठ 815

Reading 313 of 452 · Source nos. 9483–9494 · Source PDF 318

1पुनि सो नटखट गोविंद राधे।

2मोतिन लर तोरी मोरी बता दे॥ 9483॥

3इतने में रजनी भी गोविंद राधे।

4बोली कौन छूटी वाते बता दे॥ 9484॥

5मोहूँ ते सुनु लाली गोविंद राधे।

6वा नन्दलाल की कुचाल बता दे॥ 9485॥

7एक दिना जाति रही गोविंद राधे।

8सिर धरि दधि की मटुकी बता दे॥ 9486॥

9जाने कहाँ ते तहाँ गोविंद राधे।

10आ टपक्यो सो निपट बता दे॥ 9487॥

11आते ही जाने क्यों गोविंद राधे।

12फोरि दइ मोरी मटुकी बता दे॥ 9488॥

13मोरी नई सारी गोविंद राधे।

14फारि दई वाने दो टूक बता दे॥ 9489॥

15मोते कह तो सी नहिं गोविंद राधे।

16सुन्दरी ब्रज में गलबँहियाँ दे॥ 9490॥

17मोरी नथ बेसर गोविंद राधे।

18हाथन ते नोचि डारी बता दे॥ 9491॥

19इतने में श्यामा कह गोविंद राधे।

20ओ साँवरी तू उदास क्यों बता दे॥ 9492॥

21साँवरी बोली प्रिया गोविंद राधे।

22बूझो मती ना वाने का कियो बता दे॥ 9493॥

23कौन कुचाल लाल गोविंद राधे।

24नाहिं की मोहूँ संग बता दे॥ 9494॥

Original Hindi couplets from the supplied Part 2 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers continue at 5902 and end at 11111. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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