Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj
लीला माधुरी · पृष्ठ 760
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1काहे को बैठे ठाले गोविंद राधे।
2प्रेम का रोग लगावे बता दे॥ 8823॥
3मालिनि कह श्री जू गोविंद राधे।
4अब तो प्रेम रोग लग चुका बता दे॥ 8824॥
5श्री जू कह मालिनि गोविंद राधे।
6श्याम को नामहूँ जनि ले बता दे॥ 8825॥
7होगी बदनाम ब्रज गोविंद राधे।
8श्याम ना बनेगो तेरो कबहूँ बता दे॥ 8826॥
9इतने में मालिनि गोविंद राधे।
10खरी ह्वै गई लै बंसरी बता दे॥ 8827॥
11ललित त्रिभंगी तनु गोविंद राधे।
12लखि भईं लाली जू चकित बता दे॥ 8828॥
13लाली ने टेरि कही गोविंद राधे।
14अरी विशाखा लखु इत तो बता दे॥ 8829॥
15सखी ने देखि कही गोविंद राधे।
16यह मालिनि वनमाली बता दे॥ 8830॥
17फिर क्या था दोनों गोविंद राधे।
18मिले लाड़ली लाल बता दे॥ 8831॥
19सखी ने सखी ते कही गोविंद राधे।
20मोहिं मनिहारिनि लीला सुना दे॥ 8832॥
21सखी ने कही सुनु गोविंद राधे।
22एक दिन की लाल लीला बता दे॥ 8833॥
23बनि मनिहारिनि गोविंद राधे।
24गयो छैल श्री जू के महल बता दे॥ 8834॥