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प्रकाशकीय
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1प्रकाशकीय
2प्रथम भाग में सिद्धान्त पक्ष पढ़ने के बाद पाठकों को और अधिक रस
3में डुबाने वाला यह “राधा गोविंद गीत” का दूसरा भाग है। इसमें
4सिद्धान्त के साथ-साथ श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से किशोर अवस्था
5तक की लीलाओं का चित्रण अत्यधिक सजीव एवं मनोहारी है। श्री
6राधा तत्व, अवतार रहस्य इत्यादि विषयों सहित भागवत महापुराण के कैतव
7रहित श्री राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम रस का सरस निरूपण है। पढ़ने के बाद
8पाठक स्वयं अनुभव करेंगे कि वह ऐसे दिव्य प्रेम रस में सराबोर हो
9गये जो अगणित ग्रन्थों का अध्ययन करने के बाद भी दुर्लभ है।
10राधा गोविंद समिति