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Radha Govind Geet Part 1

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प्राक्कथन

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1प्राक्कथन

2श्री राधाकृष्णाभ्यां नमः

3आनन्दकंद सच्चिदानंद श्री कृष्ण चंद्र की अकारण करुणा के परिणाम

4स्वरूप ही इस “राधा गोविंद गीत” की रचना हुई है। प्रस्तुत ग्रन्थ नाना वेद,

5शास्त्र पुराण एवं नाना आप्त ग्रन्थों का सारांश है। इस ग्रन्थ में जीव, ब्रह्म,

6माया का स्वरूप, जीव, ब्रह्म, माया का भेद, ब्रह्म, परमात्मा, भगवान का

7स्वरूप, मानव देह का माहात्म्य, जीव का चरम लक्ष्य, उस लक्ष्य की प्राप्ति

8का साधन, कर्म, योग, ज्ञान, भक्ति आदि का विशद निरूपण, महापुरुष का

9लक्षण, संसार का स्वरूप, भगवत्कृपा का स्वरूप, भगवत्शरणागति रहस्य,

10श्री राधा कृष्ण भक्ति का ही साधन एवं साध्य स्वरूप, क्रियात्मक साधना, श्री

11राधा तत्त्व, श्री कृष्ण तत्त्व, श्री राधा कृष्ण शृंगार, हरि नाम माहात्म्य, राधा

12कृष्ण बाल लीला, राधाकृष्ण-पौगंड लीला, राधा कृष्ण किशोर लीला आदि

13नाना विषयों का विशद निरूपण किया गया है। यदि इस ““ग्यारह सहस्र

14एक सौ ग्यारह”” पदों में से एक पद भी पाठक को श्री युगल सरकार के प्रेम

15प्राप्ति में सहायक होगा तो मैं स्वयं को अति धन्य मानूँगा। आशा है लघु शिशु

16की तोतली भाषा की रचना मान कर पाठक वृंद इसको स्वीकार कर लेंगे।

17अन्त में श्री राधा कृष्ण के प्रीत्यर्थ उन्हीं के कमल कोमल चरण कमलों में

18यह ““राधा गोविंद गीत”” ग्रन्थ समर्पित करता हूँ।

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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