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Radha Govind Geet Part 1

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प्रकाशकीय

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1प्रकाशकीय

2“राधा गोविंद गीत” एक अद्वितीय एवं अनुपमेय ग्रंथ है। समस्त

3वेदों, शास्त्रों, पुराणों एवं अन्यान्य धर्मग्रंथों के सार को जगद्गुरु श्री

4कृपालु जी महाराज ने इतने सरस एवं सरल रूप में प्रस्तुत किया है

5कि जन साधारण भी उसे हृदयंगम करके वैदिक सिद्धान्तों का ज्ञाता

6बन सकता है जो स्वयं अध्ययन करके तो सर्वथा असंभव ही है।

7भगवत्क्षेत्र संबंधी सभी प्रश्नों का उत्तर इस अनमोल ग्रंथ में निहित

8है। सिद्धान्त-पक्ष की अभूतपूर्व समन्वयात्मक विवेचना के साथ-

9साथ लीला-पक्ष का माधुर्य भी ऐसा है कि वज्र हृदय भी भक्ति रस

10से ओतप्रोत हो जाय। अधिक क्या कहा जाय, वस्तुतः दैहिक, दैविक,

11भौतिक तापों में तप रहे कलिमल-ग्रसित जीवों के लिये यह ग्रंथ

12अनन्त करुणा-वरुणालय स्वयं भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा अपनी अकारण-

13करुणा के वशीभूत हो कर की गई शीतल सुधा-वृष्टि ही है। पाठक

14जन इस ग्रंथ का अध्ययन करके उपरोक्त बात की यथार्थता का स्वयं

15अनुभव करेंगे।

16राधा गोविंद समिति

Original Hindi couplets from the supplied Part 1 edition, grouped by printed page and chapter. Native verse numbers remain 1–5901; page order is not verse numbering. Supplied edition: Fourth edition, January 2010. Publisher: Radha Govind Samiti, New Delhi.

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