Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj — instructions signed कृपालु in the supplied anthology (PDF7)
आश्रमस्थ हेतु विशिष्ट नियम
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1आश्रमस्थ हेतु विशिष्ट नियम
21. सर्वत्र, सर्वदा राधे नाम का श्वास-श्वास से जप करते
3रहो।
42. एक शब्द भी निरर्थक न बोलो।
53. किसी साधक के कटु वाक्य को भी फील न करो।
64. 6 घण्टे से अधिक न सोवो।
75. समय मिलने पर अपनी सेवा के अतिरिक्त भी सेवा करो।
86. स्वास्थ्य का ध्यान सदा रखो।
97. खाने, पीने, पहनने आदि में अत्यन्त सादगी का अभ्यास
10करो, किन्तु मात्रा से कम सेवन न करो।
118. हरि-गुरु सेवा का महत्व समान मानो एवं मानव देह का
12साफल्य मानो।
139. सर्वदा गुरु कृपा को महसूस करो। किन्तु स्वयं के दोषों को
14निकालते रहो।
1510. कभी उपर्युक्त नियम का उल्लंघन हो जाय तो शरण्य से
16क्षमा याचना युक्त आँसू बहाओ।
17तुम्हारा
18कृपालु