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      "title": "हरि-गुरु ही हैं सच्चे सखा",
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            "मेरे तो एक ही हैं गोविंद राधे ।",
            "साँचो यार नन्दकुमार बता दे ॥ 89 ॥"
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            "रूपध्यान करुँ जब गोविंद राधे ।",
            "नींद मेरी सौत बनि आके सुला दे ॥ 216 ॥"
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            "मैंने तोहिं देखा नहिं गोविंद राधे ।",
            "ध्यान करुँ कैसे टुक झाँकी दिखा दे ॥ 234 ॥"
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            "तू तो मेरे उर में है गोविंद राधे ।",
            "मुझको भी यह अनुभूति करा दे ॥ 250 ॥"
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            "कैसा तू सखा है गोविंद राधे ।",
            "एक बार भी ना यार कहि के बुला दे ॥ 263 ॥"
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            "वेद कहे नित्य सखा गोविंद राधे ।",
            "उसी नित्य नाते को अब तो निभा दे ॥ 266 ॥"
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      "title": "दर्शन की व्याकुलता",
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            "वृंदारकवृंदवंद्य गोविंद राधे ।",
            "तुम बिन रहा नहिं जाये पल आधे॥ 124॥"
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            "नित्य विहार देखूँ गोविंद राधे ।",
            "कृपा शक्ति द्वारा अधिकारी बना दे ॥ 141 ॥"
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            "तुझसा दयालु कौन गोविंद राधे ।",
            "पूतना सी पापिनी को मुक्ति दिला दे ॥ 168॥"
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            "तूने मारे कंस आदि गोविंद राधे ।",
            "मेरे काम आदि को भी मारि के दिखा दे ॥ 163॥"
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            "दर्शन दे या ना दे गोविंद राधे ।",
            "दर्शन देने वाली लगन लगा दे ॥ 78॥"
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            "जित देखूँ दीखें गोविंद राधे ।",
            "ऐसा जादू का डंडा घुमा दे ॥ 19 ॥"
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      "heading": "राधे रानी सेवा दिला दे | Bhakti Challenge 53",
      "title": "राधे रानी सेवा दिला दे",
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            "श्यामा तेरे धाम आई गोविंद राधे ।",
            "पात्र नहिं प्रेम कैसे माँगूँ बता दे ॥ 626 ॥"
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            "मन ते हो राधे ध्यान गोविंद राधे ।",
            "वास मोहिं बरसानो धाम दिला दे ॥6592॥"
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            "राधे रानी स्वामिनी गोविंद राधे ।",
            "महल टहल कोई भी दिला दे ॥ 641॥"
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            "गहवर वन पथ गोविंद राधे ।",
            "देउँ बुहारी दिन रात बता दे ॥634॥"
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            "नवल निकुंजनि गोविंद राधे ।",
            "विहरूँ स्वामिनि संग बता दे ॥ 633॥"
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            "ब्रजधाम वास करुँ गोविंद राधे ।",
            "दिव्य दृष्टि दै के ब्रजधाम दिखा दे ॥ 632 ॥"
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      "heading": "राधे नाम महिमा | Bhakti Challenge 54",
      "title": "राधे नाम महिमा",
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            "चारों वेद सार यह गोविंद राधे ।",
            "मन राधेरूप मुख राधे राधे गा दे || 6587 ॥"
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            "धाम मेरा बरसानो गोविंद राधे ।",
            "ठकुरानी मेरी राधारानी बता दे ॥ 6593 ॥"
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            "चलु मन बरसानो गोविंद राधे ।",
            "तहँ सखि महल की टहल दिला दे ॥ 6594॥"
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            "चलु मन बरसानो गोविंद राधे ।",
            "तहँ राधे रानी नाम गुन गन गा दे || 6595 ॥"
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            "पी ले राधे नाम नित गोविंद राधे ।",
            "ही ले धरि राधे रूप प्रेम अगाधे ॥ 6603 ॥"
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            "राधा पद अरविन्द गोविंद राधे ।",
            "मकरन्द हित मन मधुप बना दे ॥ 6605 ॥"
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            "हरि तो निरन्तर गोविंद राधे।",
            "तव उर संकल्प देखें बता दे॥ 4570॥"
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            "सच्चा है मौन सोई गोविंद राधे।",
            "जामें न जाये मन जग में बता दे॥ 4574॥"
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            "सच्चा एकान्त सोई गोविंद राधे।",
            "जामें मन सदा रहे कृष्ण में बता दे॥ 4575॥"
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            "सच्चा वैराग्य सोई गोविंद राधे।",
            "मन नित्य अनुरक्त कृष्ण में बता दे॥ 4576॥"
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            "सच्चा है तप सोई गोविंद राधे।",
            "जामें हरि विरह की आग जला दे॥ 4577॥"
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            "हरि का स्मरण ऐसा गोविंद राधे।",
            "घोर पापी मन शुद्ध करा दे॥ 4415॥"
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            "जो हरि तेरे उर गोविंद राधे।",
            "सोइ हरि हैं गोलोक में बता दे॥ 5131॥"
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            "मन ते स्मरण करो गोविंद राधे।",
            "हे हरि गुरु मोहिं रास दिखा दे॥ 10787॥"
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            "मन करु सुमिरन गोविंद राधे।",
            "भोरी भारी राधे गोविंद सीधे सादे॥ 6571॥"
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            "प्रेम अवतार दोऊ गोविंद राधे।",
            "पात्रापात्र देखे बिनु प्रेम लुटा दे॥ 6567॥"
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            "शिशु ज्यों पुकारो रो के गोविंद राधे।",
            "भाजे भाजे अइहैं दोऊ गलबँहियाँ दे॥ 6568॥"
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            "श्यामा श्याम जोई भज गोविंद राधे।",
            "श्यामा श्याम भी भजें वाको बता दे॥ 4722॥"
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      "title": "गुरु कृपा",
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          "text": "(सद्गुरु-माधुरी, पद संख्या 5)"
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            "बलि श्री गुरुदेव कृपाल की।",
            "जिनके दिव्य वचन सुनि छूटत, ग्रंथि अविद्या-जाल की।",
            "जिनके वरद-हस्त के सन्मुख, चल न चाल कलिकाल की।",
            "जिनके बनत बिगारि सकत नहिं, मायाशक्ति गुपाल की।",
            "जिनके युगल-चरन परसत मन, पावत रति नंदलाल की।",
            "लखत 'कृपालु' अनुग्रह गुरु के, लीला लाड़लि लाल की॥"
          ]
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            "अरे मन! चार दिना की बात।",
            "नर-तनु शरद चाँदनी बीते, पुनि अँधियारी रात ।",
            "तू सोवत कछु जानत नाहीं, काल लगायो घात।",
            "तजत न नींद यदपि विषयन के, छिन छिन जूते खात।",
            "अवसर चूकि फिरिय चौरासी, कर मींजत पछितात।",
            "रसिकनि कही 'कृपालु' मानु गहु, युगल चरण जलजात ॥"
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            "गहो रे मन! श्याम चरण शरणाई।",
            "अंत समय कोउ काम न अइहैं, मात पिता सुत भाई।",
            "काम, क्रोध अरु लोभ, मोह, मद, इन सों कछु न बसाई।",
            "यह जग मृग-तृष्णा सम दीखत, सुख लवलेश न पाई।",
            "धन-यौवन-तन छन-भंगुर सब, ज्योँ कपूर उड़ि जाई।",
            "बहुरि 'कृपालु' न नर-तनु पाइय, बिगरी लेहु बनाई॥"
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            "अहो हरि! तुम मम साहूकार।",
            "तुम्हरे ऋणहिं उऋण नहिं होइ सक, अगनित जनम मझार।",
            "करि करुणा करुणावरुणालय, नर तनु दिय सरकार ।",
            "पुनि निज वेदन मार्ग बतायो, कीनो मम उपकार।",
            "पुनि समुझायेहु संत अनंतन, लै पुनि पुनि अवतार।",
            "कह 'कृपालु' मन तबहुँ सुन्यो नहिं, तुम ही सुनहु पुकार॥"
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            "सरस किशोरी, वयस कि थोरी, रति रस बोरी, कीजै कृपा की कोर।",
            "साधन-हीन, दीन मैं राधे, तुम करुणामइ प्रेम-अगाधे,",
            "काके द्वारे, जाय पुकारे, कौन निहारे, दीन दुखी की ओर।",
            "करत अघन नहिं नेकु अघाऊँ, भरत उदर ज्यों शूकर धावूँ,",
            "करि बरजोरी, लखि निज ओरी, तुम बिनु मोरी, कौन सुधारे दोर।",
            "भलो बुरो जैसो हूँ तिहारो, तुम बिनु कोउ न हितू हमारो,",
            "भानुदुलारी, सुधि लो हमारी, शरण तिहारी, हौं पतितन सिरमोर।",
            "गोपी-प्रेम की भिक्षा दीजै, कैसेहुँ मोहिं अपनी करि लीजै,",
            "तव गुन गावत, दिवस बितावत, दृग झरि लावत, ह्वैहौं प्रेम-विभोर।",
            "पाय तिहारो प्रेम किशोरी!, छके प्रेमरस ब्रज की खोरी,",
            "गति गजगामिनि, छवि अभिरामिनि, लखि निज स्वामिनि, बने 'कृपालु' चकोर ।।"
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          "text": "(दैन्य-माधुरी, पद संख्या 50)"
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            "दीनानाथ मोहिं काहे बिसारे, हमरिहिं बार मौन कस धारे।",
            "नाथ! अगति के गति अनाथ हम, कहहु कौन गति मोरि विचारे।",
            "गणिका गीध अजामिल आदिक, सुनत अमित पतितन तुम प्यारे।",
            "इन सम अगनित पतित रोम प्रति, वारत पतित विरद रखवारे।",
            "दंभ कोटि शत कालनेमि सम, कोटिन रावन सम मद धारे।",
            "लाजहुँ जासु लजाति अधम अस, हैं न हुये न तु ह्वै हैं भारे।",
            "कौने मुख 'कृपालु' प्रभु सन कछु, कहिय नाथ अब हाथ तिहारे ॥"
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