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      "title": "भोरे बनि जाओ",
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            "भोरे बनि जाओ क्योंकि भोरीभारी श्यामा।",
            "भोरीभारी को प्रिय भोरा उरधामा॥ 62॥"
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            "माना मन अति चंचल कह बामा।",
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            "और द्वार जाओ न अनन्य बनो बामा।",
            "त्रिगुण, त्रिताप, त्रिकर्म, काटें श्यामा॥ 47॥"
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            "आपु को इकलो न मानो कह बामा।",
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            "मन में निराशा जनि लाओ कह बामा।",
            "आशा रखो एक दिन पिघलेंगी श्यामा॥ 38॥"
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            "जो मन बुद्धि दै के भजे आठु यामा।",
            "वाकी सँभार करें शिशु जनु श्यामा॥ 18॥"
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      "heading": "जगद्गुरूत्तम उपाधि बोलें | Bhakti Challenge 32",
      "title": "जगद्गुरूत्तम उपाधि बोलें",
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            "श्रीमत्पदवाक्यप्रमाणपारावारीण, वेदमार्गप्रतिष्ठापनाचार्य, निखिलदर्शनसमन्वयाचार्य,",
            "सनातनवैदिकधर्मप्रतिष्ठापनसत्संप्रदायपरमाचार्य,  भक्तियोगरसावतार, भगवदनन्तश्रीविभूषित,",
            "जगद्गुरु 1008 स्वामि श्री कृपालु जी महाराज"
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            "गुरुधाम सम नहिं और कोउ धामा।।",
            "गुरु की शरण जाय, जाय हरि ठामा॥ 107॥"
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            "हरि गुरु ते न कछु माँगो ब्रज बामा।",
            "दोनों ते सदा करो प्रेम निष्कामा॥ 52॥"
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            "गुरु नाता मन ते जोड़ो, सदा आठु यामा।",
            "जग नाता मन ते तोड़ो, मिलें श्याम श्यामा॥ 85॥"
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            "गुरु की बुद्धि ते बुद्धि जोड़े रहो बामा।",
            "उसी बुद्धि ते चलाओ मन आठु यामा॥ 99॥"
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            "गुरु रुचि महँ रुचि राखो गुरुधामा।",
            "चाहो जनि भुक्ति मुक्ति वैकुण्ठ बामा॥ 100॥"
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            "हरि गुरु एक मानो रहो गुरुधामा।",
            "अनुकूल चिन्तन करो आठु यामा॥ 101॥"
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      "heading": "प्रेम में व्याकुलता | Bhakti Challenge 33",
      "title": "प्रेम में व्याकुलता",
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            "राधा नाम-रूप-गुण-लीला-जन-धामा।",
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            "ऐसा करे मन प्रेम चरनन श्यामा।",
            "जैसा करे मधुप, कमल सों बामा॥ 66॥"
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            "जहाँ जब रहो सोचो सदा उर धामा।",
            "मन की करतूत सारी लिखें नित श्यामा॥ 71॥"
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            "मेरी थीं, मेरी हैं, मेरी रहेंगी भी श्यामा।",
            "दृढ़ विश्वास रहे यह आठु यामा॥ 39॥"
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            "जल बिनु मीन ज्यों विकल कह बामा।",
            "वैसे मन व्याकुल हो जाय बिनु श्यामा॥ 63॥"
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            "मिले बिनु रहा नहिं जाय जब बामा।",
            "तब ही मिलेंगे तोहिं श्याम अरु श्यामा॥ 99॥"
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            "बार बार चारों धाम वारौं ब्रजधामा।",
            "नित्य विहार करें जहाँ श्याम श्यामा॥ 938॥"
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            "वृन्दावन चलो मन वहाँ श्याम श्यामा।",
            "जहाँ श्याम श्यामा वहाँ मिलें ब्रज बामा॥ 933॥"
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            "कर्मयोग देखना हो देखो ब्रज बामा।",
            "इन्द्रियों ते काम मुख ते श्याम श्यामा॥267॥"
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            "ब्रजबामा नाम लै लै सदा श्याम श्यामा।",
            "खायें पियें सोयें जागें नित आठु यामा॥ 265॥"
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            "राधे राधे गोविन्द गावें ब्रज बामा।",
            "आँसू बहावें करें सब गृह कामा॥ 266॥"
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            "राधे राधे गोविन्द रटो आठु यामा।",
            "कबहुँ तो कान करेंगे श्याम श्यामा॥ 975॥"
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      "heading": "गोपी प्रेम महिमा | Bhakti Challenge 35",
      "title": "गोपी प्रेम महिमा",
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            "मन ते मनन करु गुरु प्रेमधामा।",
            "सिर धरि कर देयँ प्रेम निष्कामा॥ 993॥"
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            "मन ते मनन करु रूप श्याम श्यामा।",
            "रो के कहु ले लो मोहूँ सँग ब्रज बामा॥ 996॥"
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            "पिय रुचि महँ रुचि राखें ब्रज बामा।",
            "सेवा सोइ जासों सुख पावें श्याम श्यामा॥ 291॥"
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            "ब्रज रस पायो नहिं कमला सी बामा।।",
            "गोपीकृपा पाये ब्रज रस ब्रजधामा॥ 923॥"
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            "गोपी प्रेम महिमा जानें ब्रज बामा।",
            "ब्रह्म पाछे पाछे घूमे बिक्यो बिनु दामा॥ 277॥"
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            "कृपा पात्र बनने को गोविंद राधे।",
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            "जग ते हटा दे मन गोविंद राधे।",
            "श्याम मिलन व्याकुलता बढ़ा दे॥ 1684॥"
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            "मेरा तेरा जनि छोड़ो गोविंद राधे।",
            "मेरा श्याम श्याम का मैं और लगा दे॥ 1730॥"
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            "जितना जो प्यार करे गोविंद राधे।",
            "उतना ही प्यार करें श्याम भी बता दे॥ 1008॥"
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            "पूर्ण प्रपन्न हो जा गोविंद राधे।",
            "बन जा पतंग डोरी हरि को थमा दे॥ 1010॥"
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            "हरि गुरु शरण में गोविंद राधे।",
            "साँचो नित्य दिव्य सुख मिलेगा बता दे॥ 1528॥"
          ]
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      "heading": "उधार बंद करो | Bhakti Challenge 37",
      "title": "उधार बंद करो",
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            "आयु जल बुलबुला गोविंद राधे।",
            "जाने कब फूट जाये सबको बता दे॥ 956॥"
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            "हरि को न भूलो मन गोविंद राधे।",
            "नर तनु सुर दुर्लभ ना गमा दे॥ 866॥"
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            "हरि की शरण गहु गोविंद राधे।",
            "हाय हाय में काहे जनम गँवा दे॥ 897॥"
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            "अगनित जनम तो गोविंद राधे।",
            "जग में गमाया यह तनु ना गमा दे॥ 869॥"
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            "भजूँगा भजूँगा कहि गोविंद राधे।",
            "काहे अगनित जन्म यूँ ही गमा दे॥ 931॥"
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            "सब तज हरि भज गोविंद राधे।",
            "तेरी सब बिगरी आपु बना दे॥ 958॥"
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            "दीनता प्रिय हरि गोविंद राधे।",
            "भक्ति में दीनता है प्रमुख बता दे॥ 4553॥"
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            "नवजात शिशु बनि गोविंद राधे।",
            "करु क्रन्दन मन शुद्ध करा दे॥ 4547॥"
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            "रसना ते गावो नित गोविंद राधे।",
            "मन ते मिलन व्याकुलता बढ़ा दे॥ 10924॥"
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            "रो रो के माँगो प्रेम गोविंद राधे।",
            "एक दिन रोना रंग लाये बता दे॥ 4568॥"
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            "द्रवीभूत मन महँ गोविंद राधे।",
            "श्यामा श्याम का रंग मिला दे॥ 10930॥"
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            "होरी खेले हरि सों सो गोविंद राधे।",
            "जाके हृदय दिव्य प्रेम हो बता दे॥ 9807॥"
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            "दिव्य प्रेम पाने की गोविंद राधे।",
            "सर्वप्रथम तीव्र लालसा बढ़ा दे॥ 4595॥"
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            "बनि के अबोध शिशु गोविंद राधे।",
            "हरि ते ही माँगो प्रेम बता दे॥ 4569॥"
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            "जगत को आँसू ना दे गोविंद राधे।",
            "हरि गुरु हित नित आँसू बहा दे॥ 4581॥"
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            "हरि गुरु कृपा मानो गोविंद राधे।",
            "मन जब हरि हित आँसू बहा दे॥ 4598॥"
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            "सोइ जीवन धन्य गोविंद राधे।",
            "जो हरि गुरु हित आँसू बहा दे॥ 4582॥"
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            "निष्काम आँसू ते ही गोविंद राधे।",
            "श्यामा श्याम पिघलें मिलें भी बता दे॥ 4578॥"
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            "कलि सम युग नहिं गोविंद राधे।",
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            "जो हरि सोई राम गोविंद राधे।",
            "जो राम सोई कृष्ण सार बता दे॥ 10814॥"
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            "नाम में है ऐसी शक्ति गोविंद राधे।",
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            "शबरी ने नाम जपा गोविंद राधे।",
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            "राम ने अहिल्या तारी गोविंद राधे।",
            "नाम कोटि पतितन पावन बना दे॥ 10866॥"
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            "नाम में है नामी वास गोविंद राधे।",
            "अस दृढ़ विश्वास नामी को बुला दे॥ 10853॥"
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