# बलिहार बलिहार तिन ब्रजनार,

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-056
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 122–124



<a id="line-1"></a>बलिहार बलिहार तिन ब्रजनार,  
<a id="line-2"></a>जिनके अधीन रहे हरि साकार।  
<a id="line-3"></a>जो था जग का अनादि पिता भरतार,  
<a id="line-4"></a>सोइ बना ब्रज शिशु नंद कुमार।  
<a id="line-5"></a>जाके डर डरे डर श्रुतिन उचार,  
<a id="line-6"></a>सोइ डरे मैया कर साँटिहिं निहार।  
<a id="line-7"></a>जाकी माया ने नचाया सारा संसार,  
<a id="line-8"></a>सोइ नाचे बूढ़ी यशुमति कर तार।  
<a id="line-9"></a>जिन माया विधि हरि हर गये हार,  
<a id="line-10"></a>सोइ नाचे गोपी छाछ पर बलिहार।

<a id="line-11"></a>जिन नाम के प्रताप मिले मुक्ति चार,  
<a id="line-12"></a>सोइ बँध्यो उखल दृगन जलधार।  
<a id="line-13"></a>जिन आगे माँगेँ भीख ज्ञानी योगी झार,  
<a id="line-14"></a>सोइ गोपी आगे माँगे भीख दे दे प्यार।  
<a id="line-15"></a>प्यार के हैं वश हरि बस यह सार,  
<a id="line-16"></a>जानि लेहु जो “कृपालु” जाननिहार।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-17"></a>भावार्थ—कवि कहता है कि मैं उन ब्रजगोपियों पर बलिहार  
<a id="line-18"></a>जाता हूँ जिन्होंने अपने प्रेम के बल पर ब्रह्म के साकार स्वरूप  
<a id="line-19"></a>श्रीकृष्ण को अपने आश्रित कर लिया है। जो श्रीकृष्ण अनादिकाल  
<a id="line-20"></a>से ही जगत् के पिता एवं पति हैं नन्द वही यशोदा एवं नन्द के  
<a id="line-21"></a>वात्सल्य-प्रेमवश ब्रज में साधारण शिशु की भाँति ही क्रीड़ा कर  
<a id="line-22"></a>रहा है। वेद जिस ईश्वर के भय से भय को भयभीत हुआ बताता  
<a id="line-23"></a>है, वही पूर्णतम ब्रह्म कृष्ण ब्रज में माता यशोदा के हाथ की साँटी  
<a id="line-24"></a>को देखकर भय से काँप रहा है। जिसकी माया से सम्पूर्ण संसार  
<a id="line-25"></a>भ्रमित होकर उसके संकेत के अनुसार ही चेष्टा करता है, वही  
<a id="line-26"></a>ब्रह्म वृद्धा यशोदा के हाथ की ताली पर नाचता है। जिसकी माया  
<a id="line-27"></a>ने ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव को भी पराजित कर दिया, वही साकार  
<a id="line-28"></a>ब्रह्म किसी ब्रज-गोपी द्वारा दिये गये छाछ के लोभ से उसके संकेत  
<a id="line-29"></a>पर नृत्य कर रहा है। इस प्रेम की बलिहारी है। जिसके नाम की  
<a id="line-30"></a>यह महिमा है कि वह चारों प्रकार की मुक्तियाँ प्रदान कर देता है।  
<a id="line-31"></a>वह स्वयं नेत्रों में जल भरकर यशोदा द्वारा ऊखल में बँधा खड़ा है।  
<a id="line-32"></a>जिनके समक्ष ज्ञानियों एवं योगियों के समूह कृपा की याचना करते  
<a id="line-33"></a>हैं, वे ही श्रीकृष्ण ब्रजांगनाओं से प्रेम की याचना करते हैं। श्री

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-34"></a>कृपालुजी कहते हैं- सम्पूर्ण ज्ञान-विज्ञान का सार यही है- कि  
<a id="line-35"></a>प्रेम के द्वारा ही श्रीहरि को प्राप्त किया जा सकता है। जो भी कोई  
<a id="line-36"></a>इस रहस्य को जानना चाहे वह जान सकता है। तुलसी दासजी ने  
<a id="line-37"></a>रामचरितमानस में भी कहा—  
<a id="line-38"></a>रामहिं केवल प्रेम पियारा, जानि लेहु जो जाननिहारा।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
