# तू ही रहु ब्रज अब मैया, मैया मैया मैया।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-028
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Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 69–71



<a id="line-1"></a>तू ही रहु ब्रज अब मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-2"></a>अति करि दीनी कन्हैया मैया,  
<a id="line-3"></a>सहि न जाय अब मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-4"></a>हम जब जाँय यमुन तट मैया,  
<a id="line-5"></a>खरो रहै तहँ मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-6"></a>काहुहिं गर लर तोरे मैया,  
<a id="line-7"></a>काहु फोरे घट मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-8"></a>छोटो अति खोटो यह मैया,  
<a id="line-9"></a>खोले घूँघट मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-10"></a>नैनन बान चलावत मैया,  
<a id="line-11"></a>घायल कर सखि मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-12"></a>कबहुँ बिरावत दशनन मैया,  
<a id="line-13"></a>जीभ दिखावत मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-14"></a>पुनि कह हौं तेरो पिय मैया,

<a id="line-15"></a>तू हूँ कह पिय मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-16"></a>सुनि गारी दारी के मैया,  
<a id="line-17"></a>कह पुनि पुनि दे मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-18"></a>जो दौरूँ पकरन कहँ मैया,  
<a id="line-19"></a>होय अलक्षित मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-20"></a>जादूगर “कृपालु” यह मैया,  
<a id="line-21"></a>हारे हरि हर मैया, मैया मैया मैया॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-22"></a>भावार्थ—ब्रज गोपियाँ यशोदा को उलाहना दे रही हैं-हे  
<a id="line-23"></a>यशोदा! अब तो ब्रज में केवल तुम और तुम्हारा पुत्र कृष्ण ही  
<a id="line-24"></a>रहेगा। अरी मैया! कन्हैया ने तो चंचलता की पराकाष्ठा कर दी।  
<a id="line-25"></a>अब तक हमने सहन कर लिया अब हमसे सहन नहीं होगा। पुनः  
<a id="line-26"></a>गोपियाँ यशोदा से कहती हैं-हम सब जब जल भरने अथवा स्नान  
<a id="line-27"></a>करने हेतु यमुना के तट पर जाती हैं तब तुम्हारा नटखट पुत्र पहले  
<a id="line-28"></a>से ही वहाँ जाकर खड़ा हो जाता है। जब हम निकट पहुँचतीं हैं  
<a id="line-29"></a>तब वह किसी गोपी के हृदय का हार तोड़ डालता है एवं किसी  
<a id="line-30"></a>का जलपूर्ण घट फोड़ देता है। यह है तो छोटा परन्तु अत्यन्त ढीठ  
<a id="line-31"></a>है। ब्रजगोपियोँ के घूँघट खोल देता है। अपने नेत्रों द्वारा रसभरे  
<a id="line-32"></a>कटाक्षपात करके सखियों को घायल करता रहता है। किसी को  
<a id="line-33"></a>दाँत दिखाकर चिढ़ाता है तो कभी जीभ निकालकर बिराता है।  
<a id="line-34"></a>किसी सखी से कहता कि मैं तेरा पति हूँ, तू अपने मुख से मुझे  
<a id="line-35"></a>अपना प्रियतम कह। यदि कोई गोपी इसे “दारी के” गाली देती है  
<a id="line-36"></a>तो प्रसन्न होकर कहता है कि पुनः गाली दे। यदि कोई सखी  
<a id="line-37"></a>इसको पकड़ने को दौड़ती है तो यह तत्काल अदृश्य हो जाता है।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-38"></a>श्री कृपालुजी कहते हैं- मैया! तुम्हारा यह पुत्र तो बड़ा जादूगर है।  
<a id="line-39"></a>इससे तो विष्णु एवं शिव भी हार मान गये।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
