# नंददुलारे प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-shatak-2005:yugal-shatak-2005-kirtan-014
Canonical page: https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-shatak-2005/yugal-shatak-2005-kirtan-014/
Book: Yugal Shatak
Source edition: 17-hi-2005; SHA-256 65e97712a464ad9a811875abe92d7ad166ef58f82c9b675cf4d010c1c940a7f7
Source PDF pages: 41–43



<a id="line-1"></a>नंददुलारे प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-2"></a>हमहूँ तो हैं अंश तिहारे,  
<a id="line-3"></a>वेद पुरान पुकारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-4"></a>अंश न हों अंशी ते न्यारे,  
<a id="line-5"></a>जल तरंग जनु प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-6"></a>आत्माहू आत्मा तुम प्यारे,  
<a id="line-7"></a>चारिहुँ वेद पुकारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-8"></a>तेरी माया ते तो हारे,  
<a id="line-9"></a>शिव सनकादिक सारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

<a id="line-10"></a>तेरी अनुकंपा चह सारे,  
<a id="line-11"></a>ब्रह्मादिक भी प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-12"></a>कर्मी, ज्ञानी, योगी सारे,  
<a id="line-13"></a>चहत कृपा तव प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-14"></a>तुम ही हो आधार हमारे,  
<a id="line-15"></a>तुम बिनु हम नहिं प्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-16"></a>आत्मा रह भीतर तव प्यारे,  
<a id="line-17"></a>तबहूँ मोहिं बिसारे, प्यारे प्यारे प्यारे।  
<a id="line-18"></a>अब “कृपालु” अस करु कछु प्यारे,  
<a id="line-19"></a>होयँ न हम तुम न्यारे, प्यारे प्यारे प्यारे।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-20"></a>भावार्थ—हे नन्दलाल! तुम्हारे वेदों ने घोषणा की है कि हम  
<a id="line-21"></a>जीवात्मा तुम्हारे ही अंश हैं। गीता में भी तुमने कहा-ममैवांशो  
<a id="line-22"></a>जीवलोके जीवभूतः सनातनः।हे मेरे प्रियतम! जिस प्रकार जल  
<a id="line-23"></a>से तरंग पृथक् नहीं हो सकती, इसी प्रकार तुम्हारा अंश स्वरूप  
<a id="line-24"></a>जीवात्मा तुम अंशी से पृथक् होकर अपना अस्तित्व ही खो बैठेगा।  
<a id="line-25"></a>मेरे प्राणों के प्राण! तुम मेरी आत्मा की आत्मा हो, ऐसा चारों वेद  
<a id="line-26"></a>पुकार पुकारकर कह रहे हैं। हे श्यामसुन्दर! शिव एवं सनकादिक  
<a id="line-27"></a>जैसे योगी एवं ब्रह्मचारी महापुरुष भी तुम्हारी माया को जीतने में  
<a id="line-28"></a>असमर्थ रहे। (शिव मोहिनी अवतार को देखकर काम विवश हो  
<a id="line-29"></a>गये। सनकादिक को बैकुण्ठ के द्वार पर प्रवेश किये जाने से रोकने  
<a id="line-30"></a>पर वे क्रोधाभिभूत हो गये।) ब्रह्मा सृष्टिकर्ता होकर भी तुम्हारी  
<a id="line-31"></a>माया से मोहित हो जाते हैं; अतः तुम्हारी कृपा की ही याचना  
<a id="line-32"></a>करते हैं। कृष्णावतार में वन भोजन के समय ग्वालों की जूठन

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-33"></a>खाते हुए गोपाल का दर्शन कर ब्रह्मा मोह को प्राप्त हो गये थे।  
<a id="line-34"></a>कर्मकाण्डी, ज्ञानी एवं योगी अपनी साधना में सफलता पाने हेतु  
<a id="line-35"></a>तुम्हारी कृपा की ही प्रतीक्षा करते हैं। हे मेरे प्राणपति! हमारे एकमात्र  
<a id="line-36"></a>आश्रय तुम ही हो। तुम्हारे बिना हमारा जीवन मृत्यु से भी कष्टप्रद  
<a id="line-37"></a>है। हे नाथ! मुझे आश्चर्य तो इस बात का है कि मेरी आत्मा निरन्तर  
<a id="line-38"></a>तुममें ही निवास करती है। परन्तु मुझे तुम्हारे सामीप्य का अनुभव  
<a id="line-39"></a>नहीं होता। तुमने मुझे क्यों भुला दिया है? हे मेरे परम प्रेमी कुपालु  
<a id="line-40"></a>प्रभु! अब तो ऐसा कुछ उपाय करो जिससे कि अनन्त काल के  
<a id="line-41"></a>लिये हमारा तुम्हारा मिलन हो जाय, पुनः कभी बिछुड़ना न हो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Shatak scan remains a separate source. Supplied edition: Third edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
