# वर दे वर दे राधे, राधे राधे राधे।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-095
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 190–192



<a id="line-1"></a>वर दे वर दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-2"></a>दिव्य धाम वृंदावन राधे,  
<a id="line-3"></a>जनम दिला दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-4"></a>निज सखियन बिच मोहूँ राधे,  
<a id="line-5"></a>सखी बना दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-6"></a>सखी बनावहु नहिं यदि राधे,  
<a id="line-7"></a>पशुहि बना दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-8"></a>पशुहुँ बनावहु नहिं यदि राधे,  
<a id="line-9"></a>खगहि बना दे राधे, राधे राधे राधे।

<a id="line-10"></a>खगहुँ बनावहु नहिं यदि राधे,  
<a id="line-11"></a>तरुहि बना दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-12"></a>तरु न बना तो ब्रज की राधे,  
<a id="line-13"></a>रजहिं बना दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-14"></a>दरस परस सेवा नित राधे,  
<a id="line-15"></a>पावूँ तेरी राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-16"></a>यदि यह सब ना दे तो राधे,  
<a id="line-17"></a>प्यास बढ़ा दे राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-18"></a>परम व्याकुलता हो राधे,  
<a id="line-19"></a>दरस परस हित राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-20"></a>पल पल विकल रहूँ नित राधे,  
<a id="line-21"></a>तव झाँकी हित राधे, राधे राधे राधे।  
<a id="line-22"></a>कह “कृपालु” जो चह दे राधे,  
<a id="line-23"></a>मानु आपुनी राधे, राधे राधे राधे॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-24"></a>भावार्थ—भक्त श्री राधा के समक्ष दीनतापूर्ण याचना  
<a id="line-25"></a>करता है- हे वरदायिनी देवी! वर देने में तुम सक्षम हो। तुम्हारा  
<a id="line-26"></a>कर कमल सदैव ही वरद-मुद्रा में रहता है। मैं भी तुमसे कुछ  
<a id="line-27"></a>प्रार्थना कर रहा हूँ, तुम उसे पूर्ण करो। मुझे अपने दिव्य वृन्दावन  
<a id="line-28"></a>धाम में जन्म दो। हे किशोरी! अपनी नित्य सखियों के मध्य  
<a id="line-29"></a>मुझे भी सखी बनाकर रख लो। हे श्यामा! यदि इतना अधिकार  
<a id="line-30"></a>देने में तुम्हें संकोच प्रतीत होता है तो मैं तुम्हें विवश नहीं  
<a id="line-31"></a>करता, मुझे श्री वृन्दावन धाम का पशु ही बना दो। रसखान की  
<a id="line-32"></a>भी कामना -

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-33"></a>“जो पशु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मझारन”।  
<a id="line-34"></a>हे रासेश्वरी राधे! यदि तुम ऐसा न करना चाहो तो मुझे अपने  
<a id="line-35"></a>नित्य धाम में किसी पक्षी का ही शरीर दे दो। रसखान कहते  
<a id="line-36"></a>हैं-  
<a id="line-37"></a>““जो खग हौं तो बसेरो करौं नित कालिंदी-कूल कदम्ब की डारन।””  
<a id="line-38"></a>हे सर्वसमर्था वृन्दावनेश्वरी! यदि मैं पक्षी बनने का भी अधिकारी  
<a id="line-39"></a>नहीं हूँ तो अपने नित्य निकुंज में वृक्ष बनाकर ही रख लो। हे  
<a id="line-40"></a>कृष्ण प्राणाधिके! यदि तुम मुझे ब्रजधाम का वृक्ष भी नहीं बनाना  
<a id="line-41"></a>चाहती हो तो श्री वृन्दावन की पावन रज ही बना दो जिससे  
<a id="line-42"></a>मुझे तुम्हारे कोमल चरणों का स्पर्श प्राप्त हो सके। हे मोहन  
<a id="line-43"></a>मोहिनी मैं किसी भी प्रकार से तुम्हारा दर्शन, स्पर्श आदि प्राप्त  
<a id="line-44"></a>कर सकूँ तथा तुम्हारी रुचि के अनुकूल कोई सेवा कर सकूँ,  
<a id="line-45"></a>ऐसा मुझे बना दो। हे अकारण करुणामयी! यदि मैं सर्वथा ही  
<a id="line-46"></a>अनधिकारी हूँ तो तुम अपने दर्शन, सेवा आदि को प्राप्त करने  
<a id="line-47"></a>की व्याकुलता ही प्रदान कर दो। श्री राधे! तुम्हारी मनोरम रूप  
<a id="line-48"></a>छटा के दर्शनार्थ व्याकुलता हो ऐसा कब होगा? मेरा क्षण क्षण  
<a id="line-49"></a>उस सौभाग्य शाली अवसर की प्रतीक्षा में ही व्यतीत हो।  
<a id="line-50"></a>“कृपालु”कहते हैं-हे कृष्णाराधिके! तुम मुझे अपनी समझकर  
<a id="line-51"></a>अपनी रुचि के अनुसार जो उचित समझो प्रदान करो।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
