# अति प्यारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-080
Canonical page: https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-ras-2005/yugal-ras-2005-kirtan-080/
Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 163–165



<a id="line-1"></a>अति प्यारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-2"></a>चंपक वरनि गौर तनु वारी,  
<a id="line-3"></a>भानुदुलारी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-4"></a>चारु चंद्रिका चमकति प्यारी,  
<a id="line-5"></a>वेणी सुमन सँवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-6"></a>हाटक मुकुट चटक छवि न्यारी,  
<a id="line-7"></a>लर मोतिन बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-8"></a>कानन कर्णफूल छवि प्यारी,  
<a id="line-9"></a>नथ बेसर छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-10"></a>अँखियाँ अति मतवारी प्यारी,  
<a id="line-11"></a>चितवनि भोरी भारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

<a id="line-12"></a>कर कंकन चूरिन छवि प्यारी,  
<a id="line-13"></a>मुँदरिन दुति छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-14"></a>अंबर नील कंचुकी प्यारी,  
<a id="line-15"></a>लर मोतिन छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-16"></a>कनकन किंकिनि धुनि मनहारी,  
<a id="line-17"></a>पग पायल झनकारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-18"></a>पग अँगुरिन बिछुवनि छवि न्यारी,  
<a id="line-19"></a>अरुण मिहावरि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-20"></a>लजत हंस लखि गति मतवारी,  
<a id="line-21"></a>मुर्छित होँ बनवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-22"></a>ब्रज रस चुवत रोम प्रति प्यारी,  
<a id="line-23"></a>पियत जूथ ब्रजनारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-24"></a>कहँ लौँ कह “कृपालु” छवि प्यारी,  
<a id="line-25"></a>लखि प्यारिहुँ बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-26"></a>भावार्थ— भक्त कवि अपनी इष्टदेवी श्री राधा की  
<a id="line-27"></a>दिव्य रूप-माधुरी का वर्णन करते हुए कहता है- मेरी प्यारी  
<a id="line-28"></a>राधा की छवि अत्यन्त ही मनभावनी है। वृषभानुनन्दिनी राधा  
<a id="line-29"></a>का गौर वर्ण चम्पा के पुष्प के समान है। शीश की सुन्दर चन्द्रिका  
<a id="line-30"></a>चमक रही है। अलकावली में जहाँ तहाँ कुसुम गूँथकर सुन्दर  
<a id="line-31"></a>वेणी सुसज्जित की गई है। स्वर्ण-मुकुट का प्रकाश निराला सौन्दर्य  
<a id="line-32"></a>विकीर्ण कर रहा है। मुकुट में शोभित मोतियों की लड़ की  
<a id="line-33"></a>बलिहारी है। श्री राधा के युगल कर्ण कर्णफूल से छविमान हैं।  
<a id="line-34"></a>नासिका में नथ एवं बेसर की शोभा अवर्णनीय है। लाड़िली की

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-35"></a>मदभरी प्यारी आँखों की चितवनि अति ही भोली भाली है।  
<a id="line-36"></a>किशोरी के युग करों के कंकण, चूड़ियों एवं अँगूठियों की  
<a id="line-37"></a>दमक अनुपम है। अर्थात् प्रत्येक आभूषण की छवि अनूठी है।  
<a id="line-38"></a>श्री राधा के दिव्य गौर वपु पर नीलाम्बर शोभायमान है। उभरे  
<a id="line-39"></a>हुए वक्ष पर कंचुकी धारण किये हैं। हृदय पर मोतियों के हार  
<a id="line-40"></a>हिल रहे हैं। कटि पर स्वर्णिम किंकिणी की मनोहारिणी ध्वनि  
<a id="line-41"></a>हो रही है। चरणों में पायल की रुनझुन बड़ी ही भली प्रतीत  
<a id="line-42"></a>होती है। चरणों की उँगलियों में बिछुवों की अद्भुत शोभा है।  
<a id="line-43"></a>मिहावर की लालिमा तो अनोखी ही है। प्यारी राधा की मदमाती  
<a id="line-44"></a>मन्द गति को निरख कर राजहंस लज्जित हो जाते हैं। श्यामसुन्दर  
<a id="line-45"></a>तो इस मधुर गति के आनन्द को न सह सकने के कारण मूर्च्छित  
<a id="line-46"></a>ही हो जाते हैं। श्री कृष्ण की प्राणवल्लभा श्री राधा के प्रत्येक  
<a id="line-47"></a>रोम से ब्रजरस टपकता रहता है, जिसे ब्रजगोपियों के समूह  
<a id="line-48"></a>निरन्तर पान करते रहते हैं। राधा की जिस रूप माधुरी पर स्वयं  
<a id="line-49"></a>श्री राधा ही बलिहार जाती हैं- उस शोभा का वर्णन भला अन्य  
<a id="line-50"></a>कौन कर सकता है?

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

[Previous](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-ras-2005/yugal-ras-2005-kirtan-079/) · [Next](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-ras-2005/yugal-ras-2005-kirtan-081/)

[Book contents](https://radhey.shreyam1008.com.np/read/yugal-ras-2005/) · [Source editions and protected PDF](https://radhey.shreyam1008.com.np/books/yugal-ras/)

Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
