# कैसो है कन्हैया तेरो मैया, मैया मैया मैया।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-048
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 106–108



<a id="line-1"></a>कैसो है कन्हैया तेरो मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-2"></a>गागरि फोरी लर तोरी ओरी मैया,

<a id="line-3"></a>कर बरजोरी भोरी मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-4"></a>चोरी चोरी ब्रजगोरी चितचोरी मैया,  
<a id="line-5"></a>कह तोरी मोरी जोरी मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-6"></a>पाछे पाछे आवे कहे हाय हाय मैया,  
<a id="line-7"></a>बनि जा तू मेरी प्यारी मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-8"></a>मारे काँकरि सिर गागरि मैया,  
<a id="line-9"></a>फारे सिर चूनरि मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-10"></a>छोटो सो अति खोटो मैया,  
<a id="line-11"></a>बड़ो होय द्रुत मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-12"></a>पकरन भजै भजै तब मैया,  
<a id="line-13"></a>लजै न नेकहुँ मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-14"></a>दूरि जाय मटके मुख मैया,  
<a id="line-15"></a>कह ले ठेंगा मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-16"></a>कारी तनु कारी कृति मैया,  
<a id="line-17"></a>हारीं सबरी मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-18"></a>कहत कान्ह बिनु एकहिं मैया,  
<a id="line-19"></a>करति सात यह मैया, मैया मैया मैया।।  
<a id="line-20"></a>पानिहिँ आग लगावति मैया,  
<a id="line-21"></a>अस ब्रज ग्वालिनि मैया, मैया मैया मैया।  
<a id="line-22"></a>कहत “कृपालु” कन्हैया मैया,  
<a id="line-23"></a>ये अति झूठी मैया, मैया मैया मैया॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-24"></a>भावार्थ—सखी यशोदा को उलाहना देती हुई कहती  
<a id="line-25"></a>है- अरी मैया! तुम तो भोली भाली हो, परन्तु तुम्हारा कन्हैया

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-26"></a>तो अत्यन्त ही ढीठ है। इसने मेरा जल का घड़ा फोड़ दिया,  
<a id="line-27"></a>गले की माला तोड़ दी। अनेक प्रकार से चंचलतायें करता है।  
<a id="line-28"></a>यह चोरी से गोपियों के चित्त चुरा लेता है और कहता है, तेरी  
<a id="line-29"></a>मेरी जोड़ी अच्छी रहेगी। मेरे पीछे पीछे चलता है और कहता  
<a id="line-30"></a>है तू मेरी प्रेयसी बन जा। सिर के घड़े में कंकड मारता है,  
<a id="line-31"></a>चूनरि को फाड़ देता है। यह छोटा है किंतु अत्यन्त ही खोटा  
<a id="line-32"></a>है। जहाँ बड़े की आवश्यकता होती है वहाँ शीघ्रता से बड़ा बन  
<a id="line-33"></a>जाता है। यदि इसे पकड़ना चाहें तो भाग जाता है। लज्जा तो  
<a id="line-34"></a>इसे छू भी नहीं गई। दूर खड़ा होकर मुख मटकाता है फिर  
<a id="line-35"></a>अगूँठा दिखा देता है। इसका शरीर तो काला है ही कर्म भी  
<a id="line-36"></a>काले ही हैं। सब गोपियाँ इससे हार गईं। गोपियों के प्रेमपूर्ण  
<a id="line-37"></a>उलाहने सुनकर नटखट कृष्ण ने यशोदा से कहा- मैया! ये  
<a id="line-38"></a>गोपियाँ तो पानी में भी आग लगाने की चेष्टा करती हैं।“कृपालु”  
<a id="line-39"></a>के शब्दोें में चतुर कृष्ण अपने दोषों को छिपाते हुए यशोदा से  
<a id="line-40"></a>कहने लगे- मैया! ब्रजगोपियाँ अत्यन्त झूठ बोलती हैं। इनकी  
<a id="line-41"></a>कोई भी बात सच नहीं है।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
