# नटवारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-043
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 96–98



<a id="line-1"></a>नटवारी छवि प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-2"></a>मोर मुकुट लट अति घुँघुरारी,  
<a id="line-3"></a>मृगमद तिलक सँवारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-4"></a>श्रुति कुंडल छवि मुनि मन हारी,  
<a id="line-5"></a>नासा बेसर प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-6"></a>अँखियाँ सुधा गरल मधु वारी,  
<a id="line-7"></a>दृग चितवनि बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-8"></a>मधुर मधुर मृदु मुसुकनि प्यारी,  
<a id="line-9"></a>लखि न मोह को नारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-10"></a>कंध लकुटि अरु कामरि कारी,

<a id="line-11"></a>कर कंकन छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-12"></a>गल गुंजन माला बलिहारी,  
<a id="line-13"></a>बनमाला छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-14"></a>झलमलात दुपटी दुति प्यारी,  
<a id="line-15"></a>कौस्तुभ मणि छवि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-16"></a>कनकन किंकिनि धुनि झनकारी,  
<a id="line-17"></a>कटि काछनी प्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-18"></a>पीत वसन दुति दमकनि प्यारी,  
<a id="line-19"></a>पग नूपुर धुनि न्यारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-20"></a>कहि न जात गति अति मतवारी,  
<a id="line-21"></a>हंस लजावनि वारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-22"></a>कोटि अनंग अंग प्रति वारी,  
<a id="line-23"></a>लखि प्यारिहुँ बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी।  
<a id="line-24"></a>लखि “कृपालु” नटवर छवि प्यारी,  
<a id="line-25"></a>नटवरहूंँ बलिहारी, प्यारी प्यारी प्यारी॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-26"></a>भावार्थ—नटवर वेष धारी श्री कृष्ण की प्यारी छवि  
<a id="line-27"></a>का कौन वर्णन कर सकता है- सिर पर मोर-पंख का अनोखा  
<a id="line-28"></a>मुकुट धारण किये हैं। केशों की लट घुँघराली है। मस्तक पर  
<a id="line-29"></a>कस्तूरी का तिलक है। कानों में कुंडल शोभा पा रहे हैं। जिन्हें  
<a id="line-30"></a>देखकर मुनियों का मन भी मोहित हो जाता है। नासिका में  
<a id="line-31"></a>बुलाक हिल रही है। नेत्र अमृत विष एवं मदिरा से परिपूर्ण हैं।  
<a id="line-32"></a>(श्वेतिमा अमृत, श्याम पुतली की कालिमा विष एवं कोरों की  
<a id="line-33"></a>लालिमा ही मदिरा है) उन नेत्रों की अनोखी चितवनि पर रसिक-

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-34"></a>जन बलिहार जाते हैं। त्रिभुवन में ऐसी कौन सी स्त्री हैं जो श्री  
<a id="line-35"></a>कृष्ण की मृदु मुस्कान की मधुरिमा पर मोहित न हो जाय?  
<a id="line-36"></a>युगल स्कंधों पर लकुटी और कामरी है। करों के कंकणों की  
<a id="line-37"></a>छवि तो अनुपम हैं। गले की गुंजमाला एवं वनमाला की छवि  
<a id="line-38"></a>पर भक्त-जन अपना सर्वस्व निछावर करते हैं। पीला दुपट्टा  
<a id="line-39"></a>झलमल कर रहा है। कम्बु-कण्ठ कौस्तुभ मणि से सुशोभित  
<a id="line-40"></a>है। सूक्ष्म कटि-प्रान्त पर सुन्दर कछनी कसे हैं। स्वर्ण किंकिणी  
<a id="line-41"></a>की झनकार निराली ही है। श्याम-तन पर पीताम्बर की दमक  
<a id="line-42"></a>है। चरणों में नूपुरों की रुनझुन है। मतवाली चाल अकथनीय  
<a id="line-43"></a>हैं। हंस भी उसे देखकर लज्जित हो जाते हैं। एक एक अंग पर  
<a id="line-44"></a>करोड़ों कामदेव निछावर किये जा सकते हैं। प्यारी राधा भी  
<a id="line-45"></a>इस छवि को निहारकर बलिहार जाती हैं।“कृपालु”कहते हैं  
<a id="line-46"></a>-स्वयं श्री कृष्ण भी अपनी छवि को निहारकर बलिहार जाते  
<a id="line-47"></a>हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
