# मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णब्रह्म सुखधाम।

Jagadguru Shri Kripalu Ji Maharaj

Source ID: native-yugal-ras-2005:yugal-ras-2005-kirtan-003
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Book: Yugal Ras
Source edition: 16-hi-2005; SHA-256 4bb470b1f96249e40eb21d96cd2bb6b8eec203f5ed370df4843197140ad5ea16
Source PDF pages: 18–21



<a id="line-1"></a>मम ठाकुर श्यामा श्याम, दोउ पूर्णब्रह्म सुखधाम।  
<a id="line-2"></a>दोउ पूर्णकाम अभिराम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-3"></a>श्यामा सेवा चह श्याम, श्यामा चह सेवा श्याम।

<a id="line-4"></a>दोउ चह दोउ सुख वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-5"></a>आनँदघन श्यामा श्याम, आनँदघन तन अभिराम।  
<a id="line-6"></a>सुख को दे सुख सुखधाम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-7"></a>नँदगाम धाम घनश्याम, बरसानो श्यामा धाम।  
<a id="line-8"></a>सँग सखन सखिन वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-9"></a>तनु नील वरन घनश्याम, तनु गोरी श्यामा बाम।  
<a id="line-10"></a>दोउ एक रूप द्वै नाम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-11"></a>चंचल ते चंचल श्याम, अति भोरी श्यामा बाम।  
<a id="line-12"></a>दोउ रिझवत दोउ वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-13"></a>दोउ प्रेमसिंधु सुखधाम, दोउ कृपा सिंधु अभिराम।  
<a id="line-14"></a>दोउ दीनबंधु छविधाम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-15"></a>श्यामा को भजु कह श्याम, श्यामा कह भजु घनश्याम।  
<a id="line-16"></a>सखि कह भजु दोउ वसु याम, राजत वृंदावन धाम॥  
<a id="line-17"></a>दोउ रस हैं श्यामा श्याम, दोउ रसिक प्रेम अभिराम।  
<a id="line-18"></a>दोउ जीवन धन ब्रजबाम, राजत “कृपालु” ब्रजधाम॥

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-19"></a>भावार्थ— मेरे आराध्य श्यामा श्याम हैं। दोनों ही  
<a id="line-20"></a>सुखसागर हैं। पूर्णब्रह्म स्वरूप हैं। अत्यन्त ही शोभाशाली हैं।  
<a id="line-21"></a>समस्त लौकिक वासनाओं से रहित हैं। स्वयं में ही परिपूर्ण हैं।  
<a id="line-22"></a>ऐसे युगल सरकार दिव्य वृन्दावन धाम में विराजमान हैं।  
<a id="line-23"></a>श्यामसुन्दर सदैव श्री राधा की सेवा-हेतु उत्कंठित रहते हैं। श्री  
<a id="line-24"></a>राधा भी निरन्तर प्रियतम की सेवा-वासना से चिंतित रहती हैं।  
<a id="line-25"></a>रात-दिन दोनों ही दोनों को सुख देने को तत्पर रहते हैं। ऐसे  
<a id="line-26"></a>प्रेमावतार युगल सरकार सदा वृन्दावन धाम में शोभित होते हैं।

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-27"></a>श्यामा श्याम आनन्दघन स्वरूप हैं। उनका शरीर और उनकी  
<a id="line-28"></a>आत्मा एक ही हैं अर्थात् वे देह देही के अन्तर से रहित हैं। ये  
<a id="line-29"></a>सुख को भी सुख प्रदान करने वाले स्वयं सुख स्वरूप ही हैं।  
<a id="line-30"></a>ऐेसे युगल सरकार सदा सदा वृन्दावन धाम में विराजमान रहते  
<a id="line-31"></a>हैं। लीला की दृष्टि से नंदनंदन श्री कृष्ण ने नंदग्राम में वास  
<a id="line-32"></a>किया। भानुनन्दिनी राधा ने बरसाना ग्राम को अपनी क्रीड़ा स्थली  
<a id="line-33"></a>बनाया। श्री कृष्ण के साथ श्रीदामा, मधुमंगल आदि सखा एवं  
<a id="line-34"></a>श्री राधा के साथ ललिता, विशाखा आदि सखियाँ सदा ही  
<a id="line-35"></a>वृन्दावन धाम में रहकर युगल सरकार की लीला में सहयोग  
<a id="line-36"></a>प्रदान करते हैं। श्री कृष्ण का शरीर नील वर्ण का है श्री राधा  
<a id="line-37"></a>गौर वर्ण की हैं। दोनों के नाम ही पृथक् पृथक् हैं। तत्वतः तो  
<a id="line-38"></a>दोनों एक ही रूप हैं। ऐसे युगल सरकार वृन्दावन में नित्य ही  
<a id="line-39"></a>विराजमान हैं। श्यामसुन्दर अत्यंत चंचल हैं। श्री राधा अत्यंत  
<a id="line-40"></a>भोली हैं। दोनों की प्रत्येक चेष्टा दोनों की प्रसन्नता के हेतु ही  
<a id="line-41"></a>होती है। ऐसे श्यामा श्याम सदा वृन्दावन धाम में निवास करते  
<a id="line-42"></a>हैं। सुख के धाम श्यामा श्याम प्रेम के समुद्र हैं। यह अभिनव  
<a id="line-43"></a>जोड़ी कृपा की भी सागर है। छवि की खान श्यामा श्याम अनन्त  
<a id="line-44"></a>दिव्य कल्याणमय गुण गण युक्त होकर भी सदा दीनों को अपनाते  
<a id="line-45"></a>रहते हैं। श्यामसुन्दर कहते हैं कि राधा की उपासना करो। श्री  
<a id="line-46"></a>राधा की अनुमति से श्री कृष्ण का भजन करणीय है। ब्रजांगनाओं  
<a id="line-47"></a>की दृष्टि से तो नित्य वृन्दावन धाम में विराजमान युगल सरकार  
<a id="line-48"></a>ही भजनीय हैं। श्यामा-श्याम दोनों ही रस-रूप होकर भी रस  
<a id="line-49"></a>के रसिक भी हैं। दोनों ही शुद्ध प्रेम के पिपासु हैं। दोनों ही

Published Hindi meaning — सुश्री ब्रजकुंजरी देवी

<a id="line-50"></a>ब्रज-गोपियों के जीवन-सर्वस्व हैं। ये युगल-सरकार नित्य  
<a id="line-51"></a>ब्रजमंडल में विचरण करते रहते हैं।

Native Hindi songs and published Hindi explanations from the supplied 2005 edition. The older image-only Yugal Ras scan is a separate source, not the scan transcribed here. Supplied edition: Fourth edition, Sharad Purnima, 17 October 2005. Published explanation: सुश्री ब्रजकुंजरी देवी.

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Unofficial source transcription. Roman transliteration is not an English translation. No missing meanings are generated.
