# वारी-वारी छवि, वारी नथवारी की।

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भाषा: हिन्दी / ब्रज
स्रोत पहचान: PRM-0984-M20-K019
मूल रचना: प्रेम रस मदिरा — जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज
माधुरी: रसिया-माधुरी
स्थानीय पद संख्या: 19
मूल पद के स्रोत पृष्ठ: 462–463

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## मूल पद

<a id="line-1"></a>वारी-वारी छवि, वारी नथवारी की।  
<a id="line-2"></a>लखि श्रृंगार लजत श्रृंगारहुँ, छवि-छवि छवि अस प्यारी की।  
<a id="line-3"></a>मणिन-अलंकृत कनक मुकुट पर, लर-मुक्त न मनहारी की।  
<a id="line-4"></a>घूँघर-वारी अति अनियारी, छवि प्यारी लट कारी की।  
<a id="line-5"></a>अम्बर नील गौर-तनु छवि जनु, घन दामिनि अनुहारी की।  
<a id="line-6"></a>झुकि झूमति नासा नथ-बेसर, मुख चूमनि छवि न्यारी की।  
<a id="line-7"></a>कर मेहँदी, पग रची मिहावरि, सिर सेंदुर अरुणारी की।  
<a id="line-8"></a>कनकन कंकन किंकिनि नूपुर, धुनि चूरिन झनकारी की।  
<a id="line-9"></a>छिनहिं मान, मुसकान छिनहिं पुनि, छवि बरसाने-वारी की।  
<a id="line-10"></a>कह “कृपालु” इक चितवनि महँ गति, लखत बनत बनवारी की॥

<a id="meaning"></a>
## हिन्दी भावार्थ

नथवारी वृषभानुदुलारी की उस मनोहारी छवि पर मैं वारी-वारी जाता हूँ। किशोरी जी के शृंगार को देखकर साक्षात् शृंगार भी लज्जित होता है एवं किशोरी जी की छवि को देखकर साक्षात् छवि भी लज्जित होती है। मणि-मण्डित स्वर्ण के मुकुट पर मोतियों की लड़ों का शृंगार नितांत मनोहारी है। किशोरी जी की घुँघराली, काली एवं घनी लटें अत्यन्त ही प्यारी हैं। किशोरी जी के गौर शरीर पर नीलाम्बर ऐसा सुशोभित है मानो बादल एवं बिजली का संयोग हो रहा हो! नासिका में पहनी हुई नथ एवं बेसर झुक-झुककर झूमती हुई बार-बार मुख चूम रही है। हाथ में लाल मेहुँदी, पैर में लाल मिहावर एवं सिर पर लाल सिन्दूर की छवि तो देखते ही बनती है। सुवर्ण के कंकण, सुवर्ण की किंकिणी, सुवर्ण के नूपुर एवं चूड़ियों की झनकार बरबस मन को मुग्ध कर लेती है। बरसाने वाली की वह छवि सर्वथा अनुपमेय है, जब वह एक क्षण में तो मान कर लेती हैं तथा दूसरे ही क्षण मुस्करा देती हैं। कृपालु' कहते हैं मुझे तो सबसे बढ़िया छवि श्यामसुन्दर की तब लगती है जब किशोरी जी एक बार घूमकर उन पर कटाक्षपात कर देती हैं।

भावार्थ के स्रोत पृष्ठ: 910-911

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## पद का स्रोत और उद्धरण

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मूल रचना की प्रथम प्रकाशन तिथि के उपलब्ध विवरण अलग हैं; इस संग्रह में उसका कोई एक निश्चित वर्ष नहीं माना गया है। अंग्रेज़ी संस्करण का अक्टूबर २००९ का प्रथम-संस्करण वर्ष मूल रचना के प्रथम प्रकाशन का वर्ष नहीं है।
